चेहरे पर आत्मविश्वास। आंखों में तरलता। सामने वाले को अपनी बात का कायल करने की सलाहियत। साथ ही, एक ऐसी शिख्सयत की बेटी, जिनका दिल्ली पर असर गुजरने के कई बरस बाद भी बाकी है। इस लड़की में वह सब-कुछ है जो लुटियंस जोन की अभिजात्यता को मोहता है। नई दिल्ली लोकसभा सीट से भाजपा ने बांसुरी स्वराज के रूप में एक ऐसा तुरुप का पत्ता फेंका है, जिसकी कोई काट आसान नहीं दिख रही।
इस सीट से पिछली बार की सांसद मीनाक्षी लेखी को लेकर जनता के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं को भी कई तरह की शिकायतें थीं। लोगों की नाराजगी की एक बड़ी वजह उनकी अनुपलब्धता थी। लेकिन, भाजपा ने बांसुरी स्वराज को आगे करके इस मुद्दे को बेमानी बना दिया है। पहली बार किसी बड़ी सियासी भूमिका में उतरी बांसुरी जनता और कार्यकर्ता, दोनों से जिस आत्मीयता से संवाद स्थापित कर रही हैं, उससे सारे गिले-शिकवे खुद-ब-खुद मिट गए हैं।
जनसंपर्क के दौरान बांसुरी हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी से लेकर हरियाणवी तक का धड़ल्ले से इस्तेमाल करती हैं। अपनी मां से पुराने रिश्तों का हवाला देते हुए वह किसी को बड़ा भाई बना लेती हैं तो किसी को पिता का दर्जा देती हैं। बांसुरी ने अपनी इस विनम्रता से कुछ ही दिनों में क्षेत्र के लोगों से एक रिश्ता कायम कर लिया है। अभी दो दिन पहले हुई सभा में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मंच से बेटी कहकर संबोधित किया। रिश्ते के यह सूत्र बाकी पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं तक भी जाते हैं।
अपने चुनाव अभियान को बांसुरी ने पूरी तरह सकारात्मक रखा है। वह आप प्रत्याशी सोमनाथ भारती पर कोई निजी हमला नहीं करतीं। उनकी आलोचना आम आदमी पार्टी और उनकी नीतियों पर ही केंद्रित रहती है। बांसुरी को पता है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की बहुलता वाले इस क्षेत्र में किसी भी तरह की नकारात्मक्ता उलटा वार कर सकती है। खान मार्केट में फकीरचंद की दुकान से मार्खेज की लव इन द टाइम ऑफ कॉलरा खरीदकर निकल रही डीयू की शोध छात्रा अभिव्यक्ति शाह चुनावी माहौल के बारे में पूछने पर निर्द्वंद्व भाव से कहती हैं- नेता तो बांसुरी जैसा होना चाहिए। सब ऐसे हो जाएं तो देश बदल जाएगा।
जातीय व क्षेत्रीय समीकरण
- अनुसूचित जाति 15.3%
- ओबीसी 12%
- वैश्य 08%
- मुस्लिम 03%
- जाट 5.6%
- ब्राह्मण 06%
- गुर्जर 7.5%
- यादव 01 %
- राजपूत 1.5%
दस विधानसभा
करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर, मोती नगर, दिल्ली कैंट, नई दिल्ली, कस्तूरबा नगर, आरके पुरम, मालवीय नगर, ग्रेटर कैलाश
- सरकारी कर्मचारी 16%, पूर्वांचली 10.3%, पंजाबी-सिख 21% व उत्तराखंडी 2.3%। (अनुमानित आंकड़े)
अटल, आडवाणी, राजेश खन्ना तक कर चुके इस सीट का प्रतिनिधित्व
नई दिल्ली लोकसभा सीट देश की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक मानी जाती है। यहां राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, सांसदों के आवास, इंडिया गेट, उच्चतम न्यायालय जैसी महत्वपूर्ण इमारतें हैं।
- राष्ट्रीय संग्रहालय, मुगल गार्डन, कनॉट प्लेस जैसे दर्शनीय स्थल भी यही हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस, दिल्ली हवाई अड्डा भी इसी लोकसभा में है। इस सीट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुचेता कृपलानी से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जगमोहन, अजय माकन और सिने स्टार राजेश खन्ना तक इस क्षेत्र के लोगों की संसद में नुमाइंदगी कर चुके हैं।
- यहां से जीतने वाले नेताओं के केंद्रीय मंत्री बनने की फेहरिस्त भी लंबी है। कृष्ण चंद्र पंत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कैबिनेट में रक्षा मंत्री बने। तीन बार लोकसभा चुनाव जीते जगमोहन केंद्र में शहरी विकास मंत्री रहे। अजय माकन और मीनाक्षी लेखी भी केंद्रीय कैबिनेट में रह चुके हैं।
सोमनाथ को केजरीवाल की रैली से माहौल बदलने की आस
- बांसुरी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे आप के सोमनाथ भारती खासी मशक्कत कर रहे हैं। भारती भी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह वर्ष 2013 से लगातार मालवीय नगर क्षेत्र से विधायक हैं। इस लोकसभा क्षेत्र के सभी दस विधायक उन्हीं की पार्टी से होने के कारण सोमनाथ को उम्मीद है कि लड़ाई कांटे की होगी। यह भी सच है कि जमानत पर बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस इलाके में रैली कर माहौल बदलने की पूरी कोशिश की है। उनकी रैली के दौरान जुटी कार्यकर्ताओं की खासी भीड़ पार्टी की उम्मीदों को धूमिल नहीं होने दे रही।
- इसके बावजूद जमीनी सच्चाई यही नजर आती है कि सोमनाथ भारती इस लोकसभा चुनाव में नई दिल्ली सीट के लिए परसोना नॉन ग्राटा सरीखे हो गए हैं। बांसुरी की तरह वह भी पेशे से वकील हैं। दलीलें देना जानते हैं। तथ्यों को अपने पक्ष में रखने की रणनीति बनाना भी उन्हें आता है। मगर जज जब लुटियंस जोन की अभिजात्य जनता हो, तो अदालती दांव-पेचों पर भरी-पूरी विरासत और व्यक्तित्व की चमक अक्सर भारी पड़ती है।