नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के संपत्ति खरीदारों की मुश्किल बढ़ने वाली हैं। सात फीसदी स्टांप ड्यूटी के विधेयक पर राज्यपाल ने सोमवार को मुहर लगा दी है। एक-दो दिन में इसकी अधिसूचना जारी हो जाएगी। ऐसे में 1 अप्रैल से रजिस्ट्री पर पांच के बजाय सात फीसदी स्टांप ड्यूटी लगना लगभग तय है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में हर साल लगभग एक लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री होती है। इसमें नोएडा से करीब 45 से 50 हजार और बाकी संपत्तियां ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। साल भर में करीब 1800 करोड़ रुपये का राजस्व जिले से मिलता है। मौजूदा समय में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के क्षेत्र में संपत्ति की रजिस्ट्री पर पांच फीसदी स्टांप शुल्क लगता है। अब सात फीसदी होने से खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ आ जाएगा।
प्रदेश सरकार के इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान फ्लैट खरीदारों को होगा। ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हाउसिंग प्रोजेक्ट के कंपलीशन करीब दो साल तक अटके रहे। बीते साल इस पर एनजीटी से हरी झंडी मिली, तब प्राधिकरण से कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी होने शुरू हुए। अभी नोएडा में पांच हजार फ्लैट भी पंजीकृत नहीं हो सके हैं, जबकि सिर्फ नोएडा में ही करीब 40 प्रोजेक्ट में करीब 25 हजार फ्लैटों की रजिस्ट्री अटकी हुई है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक लाख फ्लैट रजिस्ट्री की स्थिति में आ गए हैं।
अब तक रजिस्ट्री न हो पाने की बड़ी वजह प्राधिकरणों का बकाया न जमा होना है। बिल्डर जमीन आवंटन के एवज में किस्त नहीं जमा कर रहे। इस कारण प्राधिकरण रजिस्ट्री की अनुमति नहीं दे रहा, जबकि बिल्डर फ्लैट खरीदारों से पहले ही रजिस्ट्री का पैसा जमा करा चुके हैं।
जानकार मानते हैं कि दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप लगते ही फ्लैट खरीदारों पर 50 हजार से लेकर करीब दो लाख रुपये तक का बोझ आने का अनुमान है। वहीं, दो फीसदी स्टांप ड्यूटी बढ़ने पर कैबिनेट के फैसले के बाद से ही फ्लैट खरीदार, बिल्डर, आवासीय और औद्योेगिक संगठन विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश सरकार ने इस विरोध को दरकिनार कर दिया। इसके अलावा खरीदार बिल्डरों पर शीघ्र रजिस्ट्री का दबाव भी डाल रहे हैं, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हो रहा।
ट्रांसफर शुल्क और लीज रेंट भी
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में संपत्तियां लीज पर दी जाती हैं। इस कारण जब भी कोई खरीदार संपत्ति खरीदता है, तो प्राधिकरण से ट्रांसफर की अनुमति लेनी होती है। प्राधिकरण भारी-भरकम ट्रांसफर शुल्क लेकर ही इसकी अनुमति देते हैं। इसके अलावा लीज रेंट देनी होती है, जो कि आवासीय संपत्तियों पर कुल कीमत का 1 फीसदी और बाकी पर 2.5 फीसदी है।