ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 35 प्रोजेक्ट को नोएडा प्राधिकरण ने कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है। प्रोजेक्ट में 20 हजार फ्लैटों का आकलन है। इनकी रजिस्ट्री अगले माह होने के आसार हैं।
प्राधिकरण के नियोजन विभाग के मुताबिक ओखला पक्षी विहार का नए सिरे से दायरा तय होने के बाद 26 अगस्त से कंपलीशन सर्टिफिकेट (उपभोग प्रमाणपत्र) देना शुरू हुआ है तब से अब तक करीब 35 प्रोजेक्ट को कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी किया गया। इन बिल्डरों ने प्राधिकरण का बकाया जमा कर कंपलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त कर लिया है।
इनमें ज्यादातर रिहायशी प्रोजेक्ट हैं। बीते कुछ दिनों में सबसे ज्यादा कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी हुए हैं। खासकर ईको सेंसटिव जोन का दायरा नए सिरे से तय होने पर उठे विवाद के बाद से तेजी आई है। इस मसले पर फिर से एनजीटी में याचिका दायर कर दी गई है। इस पर सुनवाई भी शुरू हो गई है।
प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि याचिका दायर होने से बिल्डर सहम गए हैं कि कहीं एनजीटी से फिर रोक न लग जाए। इस पर रजिस्ट्री विभाग का कहना है कि प्राधिकरण से कंपलीशन लेने वाले बहुत कम बिल्डर रजिस्ट्री करा रहे हैं, मगर कई बिल्डरों ने अगले महीने फ्लैटों की रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया है।
लगा दी गई थी रोक
गौरतलब है कि ओखला पक्षी विहार से दस किलोमीटर केदायरे में आने वाले 45 से अधिक प्रोजेक्ट का कंपलीशन सर्टिफिकेट रोक दिया गया था। करीब दो साल के इंतजार के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ईको सेंसटिव जोन का दायरा नए सिरे से तय किया, जिसमें नोएडा की तरफ सिर्फ 100 मीटर का क्षेत्र ही प्रतिबंधित किया गया। उसके बाद कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी होने लगे। बता दें, कि बिना कंपलीशन सर्टिफिकेट के फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। रजिस्ट्री के बिना फ्लैट खरीदार को कानूनी तौर पर मालिकाना हक नहीं मिल पाता।
शिविर लगाने को तैयार
नोएडा के एआईजी स्टांप एसके सिंह का कहना है कि अगर बिल्डर चाहें तो रजिस्ट्री कराने के लिए उनके परिसर में ही शिविर लगाया जा सकता है। बिल्डर 50 से अधिक फ्लैटों के कागजात तैयार करने के बाद विभाग को इसकी सूचना दे दें तो शिविर लगाया जा सकता है। इसके अलावा अगर जरूरत पड़ी तो रविवार को भी दफ्तर खोला जा सकता है।
11 हजार करोड़ रुपये बकाया
प्राधिकरण ने आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक भूखंडों के करीब 200 बकाएदारों को भुगतान करने के लिए 31 दिसंबर तक का मौका दिया है। उसके बाद आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। इन बकाएदारों पर लगभग 11,000 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें 10 किलोमीटर के दायरे से बाहर के बकाएदार भी शामिल हैं। इसे पाने के लिए प्राधिकरण सितंबर और अक्तूबर में भी नोटिस भेज चुका है। कोई जवाब न मिलने पर अब प्राधिकरण से आवंटन निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। ऐसे में बिल्डरों के प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वालों की मुश्किल बनी हुई है।