सरकारी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार की सात कॉलोनियों की पुनर्विकास परियोजना के विरुद्ध नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में गैर सरकारी संस्था ग्रीन सर्कल के जरिए याचिका दाखिल की गई है।
संस्था से जुड़े और याची अनिल पराशर ने कहा कि उन्होंने न सिर्फ इस परियोजना पर ही रोक लगाने की मांग की है बल्कि एक पुराने पेड़ के बदले 10 पौधे लगाने के तर्क पर भी सवाल उठाया है। मामले पर 2 जुलाई को ही सुनवाई होगी।
एनजीटी में शुक्रवार को देर शाम दाखिल इस याचिका में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय, एनबीसीसी, दिल्ली विकास प्राधिकरण, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, वन विभाग समेत कुल 11 पक्षकार बनाए गए हैं।
सात कॉलोनियों में 16573 पेड़ों की कटाई का आरोप
याचिका में कहा गया कि एक पेड़ पूरे वर्ष करीब 23.72 लाख रुपये कीमत की आक्सीजन हमें देता है। जबकि सरोजनी नगर, नेताजी नगर, नौरोजी नगर, मोहम्मदपुर, कस्तूरबा नगर, त्यागराज नगर मेें सरकारी आवासीय कॉलोनियों और व्यावसायिक क्षेत्र तैयार करने के लिए कुल 16573 पेड़ों को काटा जाना है।
मेरे भी पुरखों ने लगाए थे पेड़
द्वारका निवासी व राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े रहे याची अनिल पराशर अब गैर सरकारी संस्था ग्रीन सर्कल से जुड़े हैं। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उनका दक्षिणी दिल्ली से बहुत पुराना नाता है। जिन पेड़ों को काटा जा रहा है उनमें से कई पेड़ उनके पुरखों ने लगाए थे। इसलिए वे चाहते हैं कि यह पूरी परियोजना रुके जिसमें निर्ममता से पेड़ों को काटा जा रहा है।