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ग्रेटर नोएडा से बागपत तक कैंसर का कहर

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राजधानी दिल्ली से सटे पश्चिमी यूपी में कैंसर तेजी से पैर पसार रहा है। ग्रेटर नोएडा से लेकर बागपत के 150 से ज्यादा गांव इस खतरनाक बीमारी की चपेट में हैं। ग्रेटर नोएडा के सादोपुर, अच्छेजा, बिसनोली, दुजाना और धर्मपुरा खेड़ा गांवों में पिछले पांच साल में कैंसर से 90 लोगों की मौत हो चुकी है और यही बीमारी गाजियाबाद से बागपत तक के कई गांवों में 100 से ज्यादा ग्रामीणों की जान ले चुकी है।
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गाजियाबाद से बागपत तक 154 गांवों में फिलहाल 800 से भी ज्यादा ग्रामीणों में कैंसर दूसरे चरण में पहुंच चुका है। वेस्ट यूपी के ये आंकड़े हिंडन और कृष्णा (काली) नदी के किनारे बसे गांवों में सर्वे करने वाले गैर सरकारी संगठनों के हैं, जबकि कितने ग्रामीण शुरुआती कैंसर की चपेट में हैं, इसकी जानकारी नहीं है। इन गांवों में बुजुर्ग और युवा ही नहीं, मासूम भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं।

समौली में 8 साल के एक बच्चे और इकलौता गांव में 9 साल के एक मासूम की कैंसर से चार माह पहले मौत हो चुकी है। इस संबंध में जल पुरुष कहे जाने वाले समाजसेवी राजेंद्र सिंह के भाई कृष्ण सिंह ने जल बिरादरी के बैनर तले डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाते वक्त और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सेवानिवृत्त वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंद्रवीर सिंह ने दोआब पर्यावरण समिति के तहत कैंसर रोगियों पर सर्वेक्षण किया है। दोआब समिति ने तीन-तीन पंचायतें भी की हैं।
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सीसा और पारा युक्त भूजल दे रहा भयावह बीमारी

ग्रेटर नोएडा से बागपत तक लोग लिवर और आंतों के कैंसर के सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसकी मुख्य वजह फैक्ट्रियों से निकलने वाला पारा व सीसा युक्त गंदे पानी का भूजल में मिलना है। हिंडन व काली नदी में कम पानी तथा घरेलू सीवरेज व औद्योगिक मिलों का केमिकल युक्त गंदा पानी भी इसकी वजह हैं।

आईसीपीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमए खान ने बताया कि ग्रेटर नोएडा में गले व स्तन कैंसर के मामले भी पाए गए हैं। इस बारे में स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर सर्वे कर रहा है। हालांकि, ग्रेटर नोएडा में स्थानीय सामाजिक संगठन की याचिका पर सरकार से जवाब तलब हुआ है और प्रदूषण विभाग से वैध-अवैध फैक्ट्रियों की सूची भी मांगी गई है।

इन गांवों में कहर
 मोदीपुरम के पनवाड़ी गांव में 30 लोग कैंसर से मारे जा चुके हैं, जबकि नंगली साधारण, अख्त्यारपुर, मोहम्मदपुर, खेड़ी, खनोदा समेत कई गांव इसका दंश झेल रहे हैं। बागपत में यमुना किनारे के गांव सांकरोद और फैजपुर निनाना, काली नदी (कृष्णा) के किनारे बसे गांगनौली और रहतना तथा हिंडन किनारे भड़ल और निरपुड़ा के ग्रामीणों में लिवर व आंत के कैंसर बढ़े हैं, जबकि टीकरी, हिम्मतपुर, सूजती, बरनावा, पुरा, मिलाना, धनौरा और झुंडपुर में भी कैंसर लगातार पैर पसारता जा रहा है।

•गाजियाबाद से बागपत तक 154 गांव चपेट में

•जल बिरादरी व दोआब पर्यावरण समिति ने किया नदी किनारे बसे गांवों का सर्वे
दादरी और वेस्ट यूपी के ज्यादातर गांवों का मैंने व्यक्तिगत रूप से दौरा किया है, और पाया है कि नदियों का पानी गंदा है। राज्य प्रदूषण बोर्ड की टीम ने पानी का सर्वे लिया है, और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट मिलने के बाद डॉक्टरों की टीम भेजकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। - डॉ. महेश शर्मा, संस्कृति व पर्यटन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)
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