यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध के कारण अधूरे रहे गए सपने को पूरा करने के लिए अस्तौली गांव की दो बहनों कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की।
वहीं देवटा गांव के प्रीत और तनुज यूक्रेन की जगह रूस के कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। संकट से बाहर निकलने पर बच्चों के परिजन डिग्री हासिल करने से खुश हैं। साल 2022 में शुरू हुए रूस के हमले कारण यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गए भारत के हजारों छात्र फंस गए थे। इनमें ग्रेटर नोएडा के भी 10 से अधिक छात्र और छात्राएं शामिल थे।
अस्तौली गांव की दो बहनें आंचल और मोनिका को भी पढ़ाई बीच में छोड़कर वापस आना पड़ा। तब दोनों ने सोचा था कि युद्ध बंद होगा तो फिर से यूक्रेन जाकर पढ़ाई पूरी करेंगी, लेकिन यूक्रेन में हालात सामान्य नहीं हो सके। काफी इंतजार के बाद दोनों बहनों ने कजाकिस्तान के एक कॉलेज में संपर्क किया। भारत सरकार की ट्रांसफर नीति के तहत दोनों बहनों ने कजाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया और बाकी दो वर्ष की पढ़ाई पूरी की। 28 जून को दोनों बहनों को एमबीबीएस की डिग्री मिली। वहां से छह जुलाई को वापस लौटी हैं। पिता विजेंद्र ने बताया कि दोनों बहनों ने अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया में पंजीकरण कराया है। संवाद
छह लाख का अतिरिक्त खर्च आया
आंचल व मोनिका के पिता ने बताया कि भारत में एमबीबीएस की पढ़ाई काफी महंगी है। जबकि यूक्रेन में 50 लाख रुपये पूरी फीस थी। कजाकिस्तान में पढ़ाई पूरी करने में छह लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च आया है। जो दाखिला शुल्क के रूप में लगा, लेकिन परिवार दोनों बेटियों की सफलता से काफी खुश हैं।
नए सिरे से शुरू करनी पड़ी पढ़ाई
देवटा गांव के तनुज भाटी और प्रीत भाटी भी यूक्रेन में एमबीबीएस करने गए थे, लेकिन युद्ध के कारण एक वर्ष की पढ़ाई करने के बाद वापस लौटना पड़ा। अब दोनों छात्र रूस के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर रहे हैं। हालांकि उनका एक साल बर्बाद हो गया। तनुज भाटी के पिता ऋषिपाल ने बताया उनको एमबीबीएस की पढ़ाई नए सिरे से शुरू करनी पड़ी।