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7 घंटे तक काटे चार अस्पतालों के चक्कर, नवजात को मिली मौत, पढ़ें बेबस पिता की कहानी

Thu, 28 May 2020 03:59 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा

सार

  • सरकारी एंबुलेंस में नहीं थे ऑक्सीजन के उपकरण, सिलिंडर चालू करने की नहीं थी चाबी
  • पुलिस, डॉक्टर और एंबुलेंस चालक पर लगाया लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग
  • पिता ने शव लेकर नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर वीडियो बनाकर सरकार से मांगा न्याय
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greater noida father - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रेटर नोएडा में डॉक्टरों की लापरवाही से सोमवार रात एक नवजात की मौत हो गई। पिता रात भर निजी और सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटते रहा, लेकिन कहीं समय पर इलाज नहीं मिला। कई घंटे इंतजार करने के बाद पहुंची एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर तो था, लेकिन उसे चलाने के उपकरण तक नहीं थे।

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आखिर में नोएडा के जिला अस्पताल में बच्चे को मृत घोषित कर दिया गया। नवजात के पिता ने भाई के साथ एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालकर प्रदेश सरकार से न्याय मांगा है। मंगलवार सुबह वीडियो को नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बनाया गया है। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हा रहा है।

राजकुमार परिवार के साथ ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-36 में रहते हैं। भाई प्रेम ने बताया कि सोमवार सुबह राजकुमार की पत्नी रेखा को सेक्टर स्वर्ण नगरी स्थित कृष्णा लाइफलाइन अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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रात साढ़े नौ बजे रेखा ने एक लड़के को जन्म दिया। बच्चा साढ़े तीन किलोग्राम का था। डॉक्टरों ने बताया कि उसका दिमाग और फेफड़ा काम नहीं कर रहा है। बच्चे को सेक्टर डेल्टा वन स्थित ग्रीन सिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया।

वे रात करीब साढ़े दस बजे नवजात को लेकर ग्रीन सिटी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। आरोप है कि अस्पताल ने 24 घंटे के इलाज का 25 हजार रुपये खर्च बताया। उनके पास इतने पैसे नहीं थे।

डॉक्टरों ने सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी और 16 हजार रुपये का बिल थमा दिया। राजकुमार ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने आठ हजार रुपये में मामला निपटवा दिया। 

इसके बाद प्रेम ने दादरी के सामुदायिक स्वास्थ्य अस्पताल में बच्चे को ले जाने के लिए रात 11:30 बजे के करीब पुलिस की मदद से सरकारी एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस रात डेढ़ बजे पहुंची, तब तक वहीं पर इंतजार करते रहे। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर था, लेकिन उपकरण नहीं थे।

दोनों भाइयों ने खुद उपकरण खरीदे। इसके बाद बच्चे को ऑक्सीजन मिल सकी। एंबुलेंस से बच्चे को लेकर दादरी के सरकारी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टरों ने इलाज करने से इंकार कर दिया और कहा कि यहां बच्चों का इलाज नहीं होता। जब डॉक्टर की वीडियो बनानी शुरू की तो एक डॉक्टर ने बच्चे को देखा और कहा कि वह जिंदा है, तुरंत नोएडा ले जाओ। 
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मृत महिला के पास वाले बेड पर लिटा दिया बच्चा

प्रेम का आरोप है कि मंगलवार तड़के 4:30 बजे नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में पहुंचे। यहां एक वार्ड से दूसरे वार्ड में घूमते रहे। हाथ में ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर इधर-उधर चक्कर काटते रहे। इस बीच एक डॉक्टर को दया आ गई। वह बच्चे को देखने के लिए तैयार हो गया। जिस बेड पर बच्चे को लिटाया गया, उसके पास वाले बेड पर एक महिला का शव रखा हुआ था। इसके बाद डॉक्टर ने बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर वीडियो बनाकर मांगा न्याय
अस्पताल में एंबुलेंस चालक ने वापस दादरी छोड़ने की बात कही, जिस पर दोनों भाई बाइक से ही ग्रेटर नोएडा आने लगे। परी चौक से कुछ देर पहले राजकुमार ने बाइक रोक दी। प्रेम ने बताया कि राजकुमार रो रहा था। वहां दोनों भाई ने मृत नवजात के साथ वीडियो बनाकर प्रदेश सरकार से मांग की है कि बच्चे की मौत लापरवाही से गई है, जिन डॉक्टर, पुलिस और अस्पताल ने लापरवाही की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

दिन भर आते रहे फोन, लेकिन कुछ नहीं हुआ
प्रेम ने बताया कि मंगलवार को दिनभर उनके पास स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के फोन आते रहे। घर पर अपनी गलती पूछने पहुंचे, लेकिन उनके परिवार को न्याय नहीं मिला। उम्मीद भी नहीं है कि उनको न्याय मिलेगा।
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