वे रात करीब साढ़े दस बजे नवजात को लेकर ग्रीन सिटी अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। आरोप है कि अस्पताल ने 24 घंटे के इलाज का 25 हजार रुपये खर्च बताया। उनके पास इतने पैसे नहीं थे।
डॉक्टरों ने सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी और 16 हजार रुपये का बिल थमा दिया। राजकुमार ने इसकी शिकायत पुलिस से की। पुलिस ने आठ हजार रुपये में मामला निपटवा दिया।
इसके बाद प्रेम ने दादरी के सामुदायिक स्वास्थ्य अस्पताल में बच्चे को ले जाने के लिए रात 11:30 बजे के करीब पुलिस की मदद से सरकारी एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन एंबुलेंस रात डेढ़ बजे पहुंची, तब तक वहीं पर इंतजार करते रहे। एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर था, लेकिन उपकरण नहीं थे।
दोनों भाइयों ने खुद उपकरण खरीदे। इसके बाद बच्चे को ऑक्सीजन मिल सकी। एंबुलेंस से बच्चे को लेकर दादरी के सरकारी अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टरों ने इलाज करने से इंकार कर दिया और कहा कि यहां बच्चों का इलाज नहीं होता। जब डॉक्टर की वीडियो बनानी शुरू की तो एक डॉक्टर ने बच्चे को देखा और कहा कि वह जिंदा है, तुरंत नोएडा ले जाओ।
प्रेम का आरोप है कि मंगलवार तड़के 4:30 बजे नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में पहुंचे। यहां एक वार्ड से दूसरे वार्ड में घूमते रहे। हाथ में ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर इधर-उधर चक्कर काटते रहे। इस बीच एक डॉक्टर को दया आ गई। वह बच्चे को देखने के लिए तैयार हो गया। जिस बेड पर बच्चे को लिटाया गया, उसके पास वाले बेड पर एक महिला का शव रखा हुआ था। इसके बाद डॉक्टर ने बच्चे को भी मृत घोषित कर दिया।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे पर वीडियो बनाकर मांगा न्याय
अस्पताल में एंबुलेंस चालक ने वापस दादरी छोड़ने की बात कही, जिस पर दोनों भाई बाइक से ही ग्रेटर नोएडा आने लगे। परी चौक से कुछ देर पहले राजकुमार ने बाइक रोक दी। प्रेम ने बताया कि राजकुमार रो रहा था। वहां दोनों भाई ने मृत नवजात के साथ वीडियो बनाकर प्रदेश सरकार से मांग की है कि बच्चे की मौत लापरवाही से गई है, जिन डॉक्टर, पुलिस और अस्पताल ने लापरवाही की है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
दिन भर आते रहे फोन, लेकिन कुछ नहीं हुआ
प्रेम ने बताया कि मंगलवार को दिनभर उनके पास स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के फोन आते रहे। घर पर अपनी गलती पूछने पहुंचे, लेकिन उनके परिवार को न्याय नहीं मिला। उम्मीद भी नहीं है कि उनको न्याय मिलेगा।