ग्रेटर नोएडा में दशहरे पर अपवादों को पीछे छोड़कर इस साल बिसरख में रावण के पुतले का दहन किया गया। गांव में पिछले कई वर्षों से रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता रहा है। माना जाता है कि पुतला दहन करने पर गांव में अनहोनी हो जाती है, लेकिन पुतला दहन करने वाले लोगों ने इसको केवल अफवाह करार दिया है।
गांव निवासी ओमेंद्र भाटी ने रविवार को कुछ लोगों के साथ मिलकर रावण के पुतले का दहन किया। ओमेंद्र देहरादून नगर निगम में पार्षद हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों ने यह अफवाह फैला रखी है। गांव में रावण का मंदिर बनाने का प्रयास किया गया। जबकि, किसी को यह नहीं पता कि रावण का जन्म कब हुआ था।
पूर्वजों ने भी कभी इसका जिक्र नहीं किया। पिछले 10 साल के अंदर ही यह कहानी फैला दी गई। अगर गांव रावण की जन्मस्थली है तो यहां के लोग दीपावाली और दशहरा क्यों मनाते हैं। उनका कहना है कि अगले साल गांव में रामलीला का मंचन और मेले का भी आयोजन कराया जाएगा।
बता दें कि बिसरख के निवासी रावण को अपना पूर्वज मानते हैं। उनका कहना है कि यह रावण की जन्मस्थली है। कुछ वर्ष पूर्व रावण के पुतले का दहन किया गया था, तब अनहोनी घटना घटी थी। इस कारण ग्रामीणों ने पुतला दहन बंद कर दिया। पुतला दहन करने के समय प्रेम सिंह, धीरेंद्र सिंह, गौतम सिंह, मोतीराम, प्रेमराज, देवेंद्र, विनोद भाटी, रमन भाटी, प्रवीण भाटी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।