वैश्विक महामारी के चलते प्लेसमेंट और रोजगार पर मंडराते खतरे पर केंद्र सरकार चिंतित है। इसी के चलते सरकार फिक्की और सीआईआई से बात करेगी। सरकार का मकसद महामारी के बीच मध्यमवर्गीय परिवारों और युवाओं की दिक्कतों का समाधान करना है। वहीं, आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर प्रो. वी रामगोपाल ने शैक्षणिक सत्र 2019-20 की प्लेसमेंट प्रक्रिया पूरा होने से पहले महामारी के लॉकडाउन में कंपनियों को पत्र लिखकर तय वादे के तहत ऑफर लेटर मिलने वाले छात्रों को नौकरी देने की मांग रखी है।
केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वैश्विक महामारी में दुनियाभर में लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में आर्थिक चुनौतियों का सामना सभी को मिल-जुलकर करना होगा। इसीलिए सरकार फिक्की, सीआईआई, नैसकॉम,एसोचैम आदि के साथ मिलकर इन दिक्कतों पर बात करेगी। इसमें प्लेसमेंट और रोजगार को बचाने और महामारी के बाद देश को आगे बढ़ाने की योजना तैयार होगी।
इसके अलावा मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने पहले ही आईआईटी और विश्वविद्यालय प्रबंधन के साथ बैठक में इन चुनौतियों को दूर करने के लिए टॉस्क फोर्स गठित करने को कहा था। इस टॉस्क फोर्स में मनोचिकित्सक भी शामिल होंगे। मनोचिकित्सक का काम युवाओं की दिक्कतों का समाधान करना है। इसमें एक तो कोरेना वायरस के चलते लॉकडाउन की उलझन और आगे नौकरी का क्या होगा आदि।