सड़क पर उड़ने वाली धूल रोकना प्राथमिकता
बैठक में सड़क से उड़ने वाली धूल को प्रदूषण का बड़ा कारण मानते हुए सड़क एजेंसियों को उन इलाकों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए जहां लोग वास्तव में धूल की समस्या झेल रहे हैं। यहां मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव, गड्ढों की मरम्मत और सड़क की बहाली की रोजाना निगरानी होगी। गड्ढों की मरम्मत तय प्रक्रिया के मुताबिक कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री और पर्यावरण मंत्री ने मेट्रो निर्माण स्थलों से उड़ रही धूल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। एलजी और मुख्यमंत्री ने डीएमआरसी को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने और निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल को जल्द से जल्द कम करने के निर्देश दिए।
सभी सड़कों की तेजी से मरम्मत के आदेश
बैठक में बताया गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण बिटुमिन की उपलब्धता प्रभावित हुई थी। इसके चलते बिटुमिन आधारित सड़क निर्माण और मरम्मत के काम में देरी हुई। अब स्थिति सामान्य होने के साथ इन कार्यों में तेजी लाई गई है। राजधानी में बिटुमिन आधारित सड़क मरम्मत के साथ सीमेंट कंक्रीट की सड़कों का काम भी जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जाम वाले 62 स्थान फिर जांचे जाएंगे
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए राजधानी के 62 ट्रैफिक चोक प्वाइंट की नए सिरे से समीक्षा होगी। यातायात पुलिस को इन स्थानों का ताजा आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, डीडीए समेत संबंधित एजेंसियां जरूरी सुधार करेंगी। एलजी ने कहा कि जाम वाले स्थानों पर वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने की स्थिति खत्म करनी होगी। इसके लिए सिग्नल व्यवस्था बेहतर करने, अतिक्रमण हटाने, चौराहों में सुधार, पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और दुर्घटना या अन्य घटनाओं पर जल्द कार्रवाई जैसे कदम उठाए जाएंगे।
अवैध पार्किंग से घिरी है दिल्ली की 60 फीसदी सड़क
बैठक में सामने आया कि राजधानी की कई सड़कों पर कारों, ऑटो और ई-रिक्शा की अवैध पार्किंग के कारण सड़क की उपलब्ध जगह का करीब 60 फीसदी हिस्सा तक घिर जाता है। इससे यातायात की रफ्तार कम होती है और जाम के साथ वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण भी बढ़ता है। ऐसे स्थानों पर अतिक्रमण विरोधी अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
ई-वाहनों की रफ्तार और बढ़ाने की तैयारी
एलजी, मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों से ई-वाहनों की ओर बदलाव तेज करने पर सहमति जताई। दोपहिया, तिपहिया, हल्के और मध्यम वाहनों समेत सभी मोटर चालित श्रेणियों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत बताई गई। इसके लिए पर्याप्त ईवी चार्जिंग ढांचा जल्द तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उद्योगों पर कागजी नहीं, नतीजे वाली निगरानी
औद्योगिक प्रदूषण को लेकर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण और ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली लगाने भर को पर्याप्त नहीं माना जाएगा। इनका वास्तविक असर प्रदूषण में कमी के रूप में दिखना चाहिए। डीपीसीसी को नियमित सत्यापन करने और लगातार नियम तोड़ने वाले उद्योगों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है। औद्योगिक उत्सर्जन मानकों के पालन और उल्लंघन की साप्ताहिक रिपोर्ट भी देनी होगी।
सर्दियों से पहले तैयारी की होगी लगातार समीक्षा
बैठक में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए अभी से सभी विभागों को अपनी कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए। बैठक में एलजी और मुख्यमंत्री के अलावा मंत्री आशीष सूद, मंजिंदर सिंह सिरसा और पंकज कुमार सिंह समेत मुख्य सचिव, एमसीडी आयुक्त, दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ, यातायात के विशेष आयुक्त, एनडीएमसी अध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी प्रधान सचिव, डीडीए उपाध्यक्ष, पर्यावरण एवं वन सचिव और परिवहन सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक का सबसे अहम संदेश यही रहा कि प्रदूषण नियंत्रण अब केवल पर्यावरण विभाग की जिम्मेदारी नहीं रहेगा। अलग-अलग विभागों को मिलकर काम करना होगा और हर स्तर पर कार्रवाई का हिसाब देना होगा। हॉटस्पॉट पर तैनात 13 वरिष्ठ अधिकारियों और पखवाड़ेवार रिपोर्ट के जरिये सरकार ने सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सीधे वरिष्ठ अफसरों तक पहुंचा दी है।