दिल्ली सरकार का टैक्स कलेक्शन नौ महीने में करीब तीन हजार करोड़ रुपये कम हुआ है। टैक्स कलेक्शन घटने से पुरानी सरकार के कुछ काम रोके जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में बुधवार रात तक चली बैठक में यह तथ्य सामने आए हैं कि वैट, राजस्व विभाग के अलावा आबकारी और परिवहन विभाग भी लक्ष्य के हिसाब से टैक्स कलेक्शन नहीं कर पाए हैं।
दिल्ली सरकार का योजनामद खर्च 16 हजार करोड़ रुपये का है। इसके तहत तमाम प्रोजेक्ट के लिए पैसे स्वीकृत थे। कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनकी कोई खास जरूरत नहीं है। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने ऐसे प्रोजेक्ट को रोकने की बात कही है।
सालाना कर व अन्य तरह का 30.6 हजार करोड़ रुपये राजस्व सरकार को मिलने का अनुमान रखा गया था, लेकिन दिसंबर 2013 तक सिर्फ 17,400 करोड़ रुपये मिले हैं।
सरकार को अब चिंता सता रही है कि पिछले वर्ष मिले 23.9 हजार करोड़ के राजस्व को भी पूरा करना मुश्किल होगा। ऐसे में बिजली और पानी की सब्सिडी देने को सरकार कुछ प्रोजेक्ट रोक सकती है।
बैठक में शामिल दिल्ली सरकार के अधिकारी बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने 31 मार्च तक जहां टैक्स कलेक्शन बढ़ाने को कहा है। बता दें कि निर्धारित बजट की पचास फीसदी राशि ही अभी तक खर्च हो सकी है। क्योंकि पहले विधानसभा चुनाव के कारण तीन महीने काम नहीं हुए।
अब लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी तो अंतिम महीने में भी कुछ ऐसा ही रहेगा। मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि विधायक फंड से चल रहे कार्यों के लिए तीस करोड़ रुपये स्वीकृत किये गए हैं। क्योंकि पुराने विधायकों ने अपना बजट खर्च कर दिया था।