केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच अधिकारों को लेकर चल रही तनातनी एक बार फिर हाईकोर्ट में खुलकर सामने आ गई। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है।
ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर केंद्र सरकार उसे रद्द कर देती है। इतना ही नहीं उपराज्यपाल व पुलिस आयुक्त हाईकोर्ट की फुल बेंच द्वारा मंजूर सरकारी वकीलों की अपेक्षा दूसरे वकीलों को नियुक्त कर आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने हालांकि इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया लेकिन स्पष्ट कर दिया कि जो अधिकारी काम नहीं कर रहे उनके खिलाफ कार्रवाई करें और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दें।
अधिकारी हमें सुन नहीं रहे हैं
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ के समक्ष वायु प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि, आप हमें काम करने का आदेश दे रहे हैं लेकिन अधिकारी हमें सुन नहीं रहे हैं। ऐसे में अदालत के आदेश का पालन कैसे होगा।
अदालत ने कहा कि काम न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाएं। मेहरा ने कहा हमने ऐसा किया। दो अधिकारी निलंबित किए तो केंद्र ने उन्हें बहाल कर दिया। हम किसी भी अधिकारी की नियुक्ति करते है तो केंद्र या उपराज्यपाल उसे बदल देते हैं।
अधिवक्ता मेहरा ने कहा कि हाईकोर्ट की फुलबेंच ने उनकी व अन्य सरकारी वकीलों की नियुक्ति की है। बावजूद इसके केंद्र सरकार के पैनल के वकील या एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) दिल्ली के मामलों में पेश हो रहे है।
हमारे पास अदालत की अवमानना का विकल्प खुला है
आपराधिक मामलों में बुरी हालत है। उपराज्यपाल व पुलिस आयुक्त उनकी जानकारी में लाए बिना ही अपने स्तर पर अपील दाखिल करवा रहे हैं। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि इस लड़ाई के चलते ही पूरे सिस्टम को लकवा मार जाएगा।
खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश के पास विचाराधीन है ऐसे में हम कुछ नहीं कर सकते। अदालत ने कहा कि हम स्पष्ट कर देना चाहते है कि जो अधिकारी काम न करे उसके खिलाफ कार्रवाई करे।
उसे बाहर का रास्ता दिखा दो। यदि सरकार व अधिकारियों का यही रवैया रहा तो हमारे पास अदालत की अवमानना का विकल्प खुला है।