नगर निगम में हुए डीजल घोटाले की जांच और अब तक की गई कार्रवाई से सरकार संतुष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव ने मामले की सही तरीके से जांच कर तह तक जाने और नगर निगम को हुए नुकसान और इसकी भरपाई के लिए जवाब तय करने के आदेश दिए हैं। निगम प्रशासन ने इस मामले में अपने स्थायी कर्मचारियों को बचाने के लिए ठेके पर लगे चार कर्मचारियों को हटाकर पल्ला झाड़ लिया है।
गौरतलब है कि करीब डेढ़ साल पहले अमर उजाला ने नगर निगम के वाहनों से डीजल चोरी कर बेचने के एक मामले का भंडाफोड़ किया था। निगम कर्मचारियों द्वारा डीजल चोरी का ये धंधा वर्षों से जारी था। हैरानी की बात ये है कि इस पूरे मामले में निगम के कई स्थायी कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध रही है। निगम के पास ऐसी कोई उचित प्लानिंग भी नहीं थी जिससे चोरी का पता आसानी से चल पाए। कर्मचारी निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाते रहे और अधिकारियों ने आंख बंद कर रखी थी।
सीएम विंडो पर शिकायत करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट रवींद्र चावला ने बताया कि नगर निगम अधिकारी इस मामले में अपने स्थायी कर्मचारियों को बचाने में लगे हैं। क्योंकि इस पूरे गोरखधंधे में कई बड़े अधिकारी शामिल हैं। केवल चार अस्थायी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लिया गया है।
इसी को लेकर दोबारा अपील सीएम विंडो पर डाली गई थी। जिसमें अतिरिक्त प्रधान सचिव डॉ. राकेश गुप्ता ने डीजल घोटाले की तह तक जाने और ये पता लगाने को कहा है कि इसमें निगम को कितना नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने निगम अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया है।