मंत्री के आदेश पर डीसी ने तुरंत हींगनपुर मार्ग और औथा हाईस्कूल पर शहीद नसरुद्दीन के नाम का बोर्ड लगा भी दिया था, लेकिन आज तक स्कूल और मार्ग को सरकार की तरफ से मंजूरी नहीं मिली। जिसकी वजह से वहां से नसरुद्दीन का नाम हटा दिया गया है।
शहीद की पत्नी आशिया कहती हैं कि उनका पति देश के लिये शहीद हुआ लेकिन सरकार उनकी कब्र पर कोई समाधी या स्मारक तक नहीं बना सकी।
लड़के के बड़े होने सरकार ने सरकारी नौकरी देने का वादा किया गया था। इन वादों को पूरा करना तो दूर आज तक कोई राजनेता और प्रसाशन का अधिकारी उनका हालचाल पूछने तक नहीं आया है।
वहीं बेटा इरशाद का कहना है कि सभी शहीदों की याद में स्मारक बने हैं, उनको हर साल श्रद्धांजलि देने के लिये कोई न कोई सरकार का नुमाइंदा जाता है, लेकिन उनके पिता को श्रद्धांजलि देने के लिये आजतक कोई नहीं आया।
गांव के रहने वाले महबूब कहते हैं कि सरकार ने शाहचौखा से हींगनपुर तक सड़क और गांव औथा हाई स्कूल को नाम नसरुद्दीन के नाम से रखने की घोषणा की थी लेकिन कागजों में आजतक नहीं चढ़ा।