दिल्ली हाईकोर्ट से शिक्षकों का वेतन बढ़ाने के लिए मिली राहत के बाद स्कूलों ने फीस बढ़ा दी है। हाईकोर्ट के फैसले के ध्यानार्थ स्कूलों ने अभिभावकों को नोटिस भेजकर बढ़ी फीस भरने को कहा है। वहीं, शिक्षा निदेशालय ने बीते बृहस्पतिवार को ही आदेश जारी किया था कि स्कूलों को फीस बढ़ाने के लिए सरकार से मंजूरी लेना जरूरी है। अब सरकार व निजी स्कूलों की लड़ाई के चलते अभिभावक परेशान हैं। सोमवार को यह मामला फिर हाईकोर्ट पहुंच रहा है।
बीती 15 मार्च को निजी स्कूलों ने सातवें वेतन आयोग के नाम पर शिक्षकों को सैलरी बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में शिक्षा निदेशालय के सर्कुलर को चुनौती दी थी। कोर्ट ने स्कूलों को फीस बढ़ोतरी की मंजूरी प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि बिना फीस बढ़ोतरी के स्कूल शिक्षकों को वेतन कैसे देंगे। इस राहत के बाद स्कूलों ने बढ़ी फीस लेने के लिए अभिभावकों को नोटिस भेजने शुरू कर दिए। इसके बाद कुछ अभिभावकों ने फीस जमा करवा दी तो कुछ ने आपत्ति करनी शुरू कर दी।
दरअसल, सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुछ नहीं किया, लेकिन बृहस्पतिवार को अचानक स्कूलों को हाईकोर्ट के ही एक पुराने फैसले का हवाला देकर फीस बढ़ाने से मना कर दिया। शिक्षा निदेशालय ने तर्क रखा कि फीस बढ़ाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी है। सरकार इस तर्क के साथ सोमवार को हाईकोर्ट में जा रही है।
वहीं, स्कूल की बढ़ी फीस के कारण अभिभावक हलकान हो गए हैं। कई स्कूलों में बीते साल के मुकाबले कुल फीस में तीन हजार तक की बढ़ोतरी हो गई है। एक अभिभावक ने बताया कि वह बीते साल तक तीन महीने की फीस लगभग 14 हजार दे रहे थे, लेकिन अब लगभग 17 हजार फीस चुकाई है। दो बच्चों के हिसाब से सीधे-सीधे उन पर छह हजार का बोझ बढ़ गया है।