देश के विभिन्न हिस्सों से एकजुट हुई महिला बाइक राइडरों की बाइक रैली के साथ ही शनिवार को बुलंदशहर से बुलंदी की गूंज सुनाई दी। ‘पतवार बनूंगी लहरों से लड़ूंगी, अरे मुझे क्या बेचेगा रुपैया’... स्वानंद किरकिरे की ये लाइनें देश की राइडर बेटियों पर बिल्कुल सटीक बैठतीं हैं।
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बाइक रैली के माध्यम से समाज में महिलाओं को उनके हक और बराबरी के लिए जागरूक करने का बीड़ा महिला राइडर्स ने उठाया है। महिला व बाल विकास मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने अमर उजाला और गूंज की बाइक रैली को जैसे ही विराट फार्म पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, वैसे ही देश के विभिन्न हिस्सों से आई 12 महिला बाइक राइडर महिला सशक्तिकरण का संदेश लेकर विभिन्न जनपदों के लिए रवाना हो गईं।
रैली का मकसद महिला सशक्तिकरण और महिला हेल्प लाइन नंबर 181 के प्रति जागरूकता फैलाना है। आगरा की मूल निवासी पल्लवी फौजदार बाइक रैली का नेतृत्व कर रही हैं।
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उनके साथ रोहिणी दिल्ली से मोनिषा, नोएडा से मोनिका सचदेवा, उत्तराखंड से ममता राना, चेन्नई से अनीता कृष्णन, नोएडा से सीमा सेठ, दिल्ली से सुजाता, जयपुर से तरुणा सिंह, गुवाहाटी असम से निर्मली व एनी शर्मा, कोलकाता से कृष्णा सिंह व लखनऊ से चारु मौजूद रहीं। समूह में शामिल महिला बाइक राइडर्स में अधिकतर सदस्य 25 हजार किमी से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं।
16 मानव पास पार कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड
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- फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से आगरा निवासी पल्लवी फौजदार के मुताबिक वर्तमान में वह दिल्ली में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। 20 साल से बाइक राइडिंग कर रही हैं। महिला सशक्तिकरण समेत अन्य मुद्दों पर एक लाख किमी से अधिक दूरी बाइक रैलियों में तय कर चुकी हैं।
वर्ष 2015 में उन्होंने 16 मानव पास लेह लद्दाख में पार किए थे, जिनमें से 8 पासों की ऊंचाई पांच हजार फुट से अधिक थी। इसी साल मीठे पानी की झील और विश्व के सबसे ऊंचे माउंटेन पर बाइक राइडिंग की थी। जिसकी ऊंचाई 18774 फीट थी। इसके बाद उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ते हुए इसी साल 19323 फीट ऊंचे मानव पास को पार कर अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया।
पार्क से बाइक निकाला तो लगा राइडिंग का शौक
नोएडा निवासी बाइक राइडर मोनिका सचदेवा का कहना है 2007 में हुई एक छोटी सी घटना से उन्हें बाइक राइडिंग का शौक लगा दिया। उनके भाई ने उनसे अपनी बाइक को पार्क से बाहर लाने के लिए कहा था।
इससे उनका हौसला बढ़ा। लगा वह बाइक चला सकती हैं। महिलाओं के हित में रोज नए कदम उठाने शुरू कर दिए। तब से आज से तक वह 10 हजार किमी से अधिक बाइक चला चुकी हैं।
पढ़ाई के दौरान महिला सशक्तिकरण के लिए काम
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- फोटो : अमर उजाला
रोहिणी दिल्ली निवासी मोनिषा ने करीब आठ माह पूर्व बाइक राइडिंग की दुनिया में अपना कदम रखा। मोनिषा के मुताबिक उन्हें महिलाओं के हित के लिए कार्य करना अच्छा लगता है।
कहा कि वह अपने हर कदम को महिलाओं के हित में उठाने के लिए अग्रसर हैं। हालांकि अभी मोनिषा ने बाइक राइडिंग में चंद किमी का ही सफर तय किया है, लेकिन व अपने जीवन में महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं।
दो सालों में तय की 80 हजार किमी की दूरी
मूल रूप से उत्तराखंड निवासी ममता राना को बाइक राइडिंग में अभी दो साल ही हुए हैं, लेकिन उन्होंने 80 हजार किमी की दूरी तय कर महिलाओं को आगे बढ़ाने की मेहनत की है।
ममता का कहना है लोगों ने बाइक राइडिंग के दौरान विभिन्न प्रकार की बातें कर उनके मनोबल को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उनका मनोबल लगातार बढ़ता गया और वह महिलाओं के हित में लगातार कार्य करती गईं।
महिला सशक्तिकरण के लिए उठाया बीड़ा
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- फोटो : अमर उजाला
चेन्नई निवासी अनीता कृष्णन का कहना है उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए बीड़ा उठाया है। अनीता का कहना है महिलाओं को जागरूक करने के लिए वह 15 वर्षों से बाइक राइडिंग कर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रही हैं। वह दिल्ली में अपने परिवार के साथ रह रही हैं। परिवार ने उनको बाइक राइडिंग के लिए पूरा समर्थन दिया। जिसके चलते वह आज इस मुकाम पर पहुंच सकी हैं।
कारपोरेट सेक्टर में नौकरी के साथ कर रहीं जागरूक
नोएडा निवासी सीमा सेठ यूं तो कारपोरेट सेक्टर में नौकरी कर रही हैं, लेकिन इसके अलावा भी वह महिलाओं को जागरूक करने के लिए विभिन्न कदम उठा रही हैं।
अक्सर नौकरी से छुट्टी लेकर वह महिला सशक्तिकरण समेत अन्य सामाजिक मुद्दों पर बाइक रैली निकाल चुकी हैं। सीमा सेठ का कहना है उन्हें करीब डेढ़ साल पहले बाइक राइडिंग का शौक लगा और अभी तक वह करीब तीन हजार किमी का सफर तय कर चुकी हैं।
राइडर कृष्णा सिंह 15 साल से बाइक राइडिंग कर रही हैं। शादी के बाद उनके ससुराली में बाइक राइडिंग को लेकर उन्हें पूरा समर्थन दिया, लेकिन पड़ोस व रिश्तेदारों ने उनका जमकर मजाक उड़ाया।
अनसुना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना जारी रखा। सुजाता का कहना है भविष्य में महिलाओं के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। ससुराल में उनके परिवार को बाइक वाली बहू या जींस वाली बहू के नाम से जानते हैं।
असम की पहली बाइक राइडर बनीं
गुवाहाटी असम निवासी निर्मली अपने क्षेत्र की पहली महिला बाइक राइडर हैं। बाइक राइडिंग शुरू की तो असम में लोगों ने काफी बातें की, लेकिन उनके परिजनों और उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।
खिलाड़ी से बन गई बाइक राइडर
लखनऊ निवासी चारु वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ फिजिकल ऐजूकेशन में स्नातक कर रही हैं। वह बास्केटबाल की प्रदेश स्तर की खिलाड़ी हैं। हाल ही में वह टूर्नामेंट को समाप्त कर सीधा बाइक रैली के लिए आई हैं। परिवार का पूरा समर्थन है। वह महिलाओं के लिए हित के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।
मां से प्रेरित होकर उठाया बीड़ा
गुवाहाटी असम की रहने वाली एनी शर्मा ने अपनी मां से प्रेरणा लेकर महिला सशक्तिकरण को लेकर बीड़ा उठाया है। दो साल पहले उन्होंने बाइक राइडिंग शुरू की थी, जिसके बाद से वह अब तक करीब 49 हजार किमी का सफर तय कर चुकी हैं। एनी शर्मा ने कहा उनकी मां राखी शर्मा राष्ट्रीय स्तर की पावर लिफ्टर खिलाड़ी रही हैं। जिससे प्रेरणा लेकर वह आगे बढ़ रही हैं।