-दुकानें बंद, अंदर करोड़ों का माल और बाहर बैठे व्यापारी कर रहे रखवाली, कारोबार ठप होने से गुस्सा और चिंता बढ़ी
सनी सिंह
नई दिल्ली। चांदनी चौक के कूचा महाजनी में सीलिंग के बाद कारोबारियों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही हैं। जिन दुकानों में दिनभर सोने-चांदी के गहनों की खरीद-बिक्री होती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा है। व्यापारी ग्राहकों को गहने दिखाने के बजाय दुकानों के बाहर बैठकर अंदर बंद अपने माल की निगरानी करने को मजबूर हैं। कारोबारियों का कहना है कि दुकानें बंद होने से न केवल उनका कारोबार ठप हो गया है, बल्कि कारीगरों और कर्मचारियों के सामने भी रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
सील दुकानों के बाहर बैठे व्यापारियों के चेहरों पर गुस्सा और चिंता साफ दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि दुकान के अंदर माल बंद है, लेकिन उसकी जिम्मेदारी अब भी उन्हीं पर है। ऐसे में वे घर भी नहीं जा पा रहे हैं। ग्राहक लगातार अपने ऑर्डर और सामान की डिलीवरी के बारे में पूछताछ कर रहे हैं, लेकिन दुकानें सील होने के कारण व्यापारी उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। कारोबारियों को आशंका है कि दुकानें लंबे समय तक बंद रहने से नुकसान और बढ़ेगा।
समाधान के लिए कर रहे प्रयास
ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से लेकर मंत्रियों तक से बात की है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की समस्या दूर करने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
कारीगरों के सामने वेतन का संकट
कारोबारी अजीत प्रसाद जैन बताते हैं कि हमारे साथ जुड़े कारीगरों पर भी आर्थिक संकट आ गया है। अब उनके लिए वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा है। हमारे कर्मचारी भी हमारे साथ बैठकर सामान की निगरानी कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन दुकान की सील खुल जाएगी।
ऑर्डर को लेकर परेशान ग्राहक
व्यापारी प्रदीप खंडेलवाल बताते हैं कि दुकान के अंदर माल पड़ा है और ग्राहक अपने ऑर्डर के बारे में पूछ रहे हैं। जितने दिन दुकान बंद रहेगी, उतना ही कारोबार प्रभावित होगा।कारोबारी आशीष जैन ने कहा कि पहले दुकान में बैठकर ग्राहकों को सामान दिखाते थे, लेकिन अब उसी दुकान के बाहर बैठकर अंदर बंद सामान की निगरानी करनी पड़ रही है। हम इंतजार कर रहे हैं कि सीलिंग जल्द खुले और कारोबार दोबारा शुरू हो सके।