अक्षय तृतीया पर सोने की बिक्री काफी फीकी रही। ऐसा पहली बार हुआ कि इस दिन ज्वेलरी की दुकानों पर ताले लटके रहे और लोगों ने खुद को लॉकडाउन किया हो। जबकि मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने से जहां कुबेर का घर में आगमन होता है तो इस दिन विवाह को भी बेहद शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया पर हर साल इस दिन ज्वेलरी की दुकानों पर भीड़ उमड़ती है और पूरे महीने में सोने की जितनी बिक्री होती है वह इसी एक दिन में हो जाती है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से इस बार सब कुछ लॉकडाउन रहा। पुरानी दिल्ली स्थित कूचा महाजनी, दरिबां स्थित ज्वेलरी की सभी दुकानें रविवार को बंद रहीं।
हालांकि ज्वेलर्स ने ऑनलाइन व्यापार में छूट जरूर दी थी। लेकिन बहुत कम लोगों ने सोने की ऑनलाइन बुकिंग की। ज्वेलर्स का अनुमान है कि दिल्ली में महज 2-3 प्रतिशत ही सोने-चांदी की बिक्री हुई। पैसों में अनुमान लगाएं तो महज 10 करोड़ रुपये की जबकि हर साल ढाई सौ से तीन सौ करोड़ रुपये की बिक्री होती है।
दिल्ली बुलियन एंड वेलफेयर एसोसिएशन के विमल गोयल ने बताया कि अभी तक के व्यापार में इतना फीका दिन कभी नहीं रहा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि व्यापारियों की समस्या और उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सहायता करें। क्योंकि लॉकडाउन में भी कारीगर का वेतन किसी व्यापारी ने नहीं रोका है।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल व ऑल इंडिया ज्वेलर्स एवं गोल्डस्मिथ फेडरेशन के राष्ट्रीय संयोजक पंकज अरोरा ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन सोने का व्यापार लॉकडाउन की वजह से पूरा फीका रहा। डिजिटल माध्यम से त्योहार के शगुन के रूप में थोड़ा बहुत व्यापार हुआ।
कॉमर्स मंत्रालय के एपेक्स बॉडी जेम्स एंड ज्वेलरी स्पॉट के उत्तर भारत के चेयरमैन अशोक सेठ ने कहा कि इस दिन हर लोग चाहते है कि सोना या चांदी जेवरात के रूप में घर में लाएं।
दुख की बात है कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब समेत कई राज्यों को ई-मेल किया। बावजूद किसी राज्य सरकार ने दो घंटे तक की अनुमति नहीं दी कि दुकान व शो-रूम खोल सकें। मनोकामना भी हम लोगों का नहीं पूरा कर सके। यह निंदनीय कदम है। केंद्र सरकार ने तो अनुमति दी, लेकिन राज्य सरकार ने आज के लिए भी अनुमति नहीं दी।