कोरोना वायरस की महामारी के चलते देश ने एक लंबे समय तक लॉकडाउन को झेला है। इसके चलते कई तरह के दुष्प्रभाव भी हर किसी ने अपने जीवन में देखे। कई लोगों के आगे खाने तक का संकट पैदा हो गया।
वहीं दिल्ली के कई नौजवानों की नौकरियां ही चली गईं। इसके चलते लोगों में मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन भी काफी देखने को मिला। दिल्ली की ऐसी ही एक शख्स ने लॉकडाउन में घर बैठे बच्चों के लिए देश की पहली कोरोना संक्रमण पर आधारित एक कॉमिक की रचना कर डाली। गो कोरोना गो कॉमिक की कहानी एक सुपर हीरो से जुड़ी है जो कोरोना वायरस का डटकर मुकाबला करता है।
पांच स्कूली बच्चों के ग्रुप से होते हुए सुपर हीरो तक पहुंची इस कहानी को अलका बरबेले ने तैयार किया है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन लगने के बाद हर कोई घर से ही काम कर रहा था। शुरुआत में घर बैठे बैठे बड़ा अजीब लगने लगा। फिर पड़ोसी बच्चों के साथ समय व्यतीत करने लगे।
अलका बताती हैं कि उस वक्त हर कोई अपनी अपनी समस्याओं में लगा था लेकिन बच्चों की ओर किसी का ध्यान नहीं था। दिन भर टीवी चैनलों पर कोरोना की खबरें और मनोरंजन के नाम पर कुछ और न मिलने की वजह से बच्चे अपने दिमाग में तरह तरह की कहानियां बनाने लगे थे। ऐसे में इन बच्चों को सही जानकारी और सुरक्षा के तरीके बताना बेहद जरूरी था। उन्होंने खेलते खेलते बच्चों को कोरोना वायरस से बचने के लिए एक ऐसी कहानी बनाई ताकि मासूम बच्चे भी पूरे आनंद के साथ इसे सीख सकें। बस यही से गो कोरोना गो की कहानी लिखना शुरू कर दिया।
नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. आरपी बेनीवाल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान और बाद में बच्चों पर काफी असर देखने को मिला है। यह सच है कि कोरोना की ही चर्चाओं के चलते बच्चों में न सिर्फ डर देखने को मिल रहा है बल्कि वह अपने मन से कहानियां भी तैयार कर रहे हैं। उनके माता पिता भी इस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं।
जबकि इस वक्त बच्चों को सही जानकारी देना बहुत जरूरी है। नई दिल्ली के दरियागंज स्थित यश पब्लिकेशंस के जतिन कुमार ने बताया कि गो कोरोना गो की कहानी एकदम नई और अनोखी है। बच्चों पर केंद्रित यह कहानी बहुत कुछ बयां करती है। इसीलिए गो कोरोना गो को प्रकाशित करने का फैसला लिया। अमेजन, फ्लिपकॉर्ट इत्यादि पर यह उपलब्ध है।