इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी और आर्किटेक्चर कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक यदि नौकरी छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें पहले एक महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। बिना नोटिस और सत्र के मध्य में शिक्षक अचानक नौकरी नहीं छोड़ सकते हैं। यदि कोई शिक्षक नौकरी छोड़ता है तो उसके सर्टिफिकेट संबंधित कॉलेज को वापस लौटाने होंगे। यदि शिक्षक के नौकरी छोड़ने के बाद भी कोई कॉलेज प्रबंधन सर्टिफिकेट वापस नहीं करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जाएगी।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के पास छात्रों की तर्ज पर पहली बार 500 से अधिक शिक्षकों ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दी है। शिक्षकों ने एआईसीटीई को भेजी शिकायत में लिखा है कि वे नौकरी बदलना चाहते हैं, लेकिन संबंधित कॉलेज उनके शैक्षिक सर्टिफिकेट वापस नहीं कर रहे हैं। इसके चलते वे चाहकर भी दूसरी नौकरी ज्वाइन नहीं कर सकते हैं। आकर्षक वेतन व अन्य सुविधाओं के साथ दूसरी नौकरी जाने का कारण शैक्षिक सर्टिफिकेट न होना है। क्योंकि ज्वाइनिंग के दौरान पहले वाले कॉलेज ने उनके शैक्षिक सर्टिफिकेट अपने पास रख लिए थे।
शिक्षकों की शिकायत पर एआईसीटीई ने कॉलेज प्रबंधन को नोटिस भेजते हुए जवाब मांगा है। काउंसिल ने कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि छात्रों की तर्ज पर शिक्षकों के सर्टिफिकेट भी नहीं रखे जा सकते हैं। दाखिले की तर्ज पर नौकरी के दौरान सर्टिफिकेट जांचने के बाद संबंधित शिक्षकों को वापस लौटा दिए जाएं। यदि कोई संस्थान सर्टिफिकेट नहीं लौटाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
दाखिला रद्द करने पर सालभर की फीस काटी
काउंसिल के पास 2018-19 सत्र के तहत छात्रों ने शिकायत दी है कि दाखिला रद्द करने पर कॉलेज प्रबंधन ने सालभर की फीस काट ली है। काउंसिल ने ऐसे कॉलेजों को नोटिस में कहा है कि यदि कोई छात्र अपना दाखिला रद्द करवाता है तो संस्थान उक्त छात्र से सालभर की फीस नहीं मांग सकते हैं। यदि कोई संस्थान ऐसा करता है तो यह एआईसीटीई नियमों का उल्लंघन होगा। ऐसे कॉलेज की मान्यता या कोर्स की मान्यता तक रद्द हो सकती है।