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दो दिनों में 'गीता' की 2 लाख कॉपियां बिकीं

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गीता आज भी प्रासंगिक है। यह सच्चाई लोग मान चुके हैं, जिसका प्रमाण देखना हो तो दिल्ली पुस्तक मेले में आकर देखें। फेसबुक और ट्विटर पर अपनी बात रखने वाला युवा भी गीता की खरीद में दिलचस्पी ले रहा है।
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फेयर की मोस्ट सेलर बुक भी गीता ही बनी हुई है, पिछले दो दिनों में इसकी दो लाख प्रतियां बिक चुकी हैं। लोग इसे हमेशा साथ रखने से लेकर घर में रखने तक अलग-अलग रूप में खरीद रहे हैं। लोगों की मांग को देखते हुए कुछ साल पहले बंद कर दिए गए गीता संग्रह को यहां फिर से उपलब्ध कराया गया है।

विद्वानों का कहना है कि गीता अगर हमेशा आपके पास है तो ही आप इसका महत्व समझाते हुए बुराई से बच सकते हैं। गीता के ज्ञान की महत्ता लगातार बढ़ने पर ही गीता प्रेस ने सुलभ रूप से गीता रखने के कई रूपों को तैयार किया है।
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ताबीज में पिरोकर रखने के लिए गीता के सभी 700 श्लोकों को एक पेज में दिया गया है। इसकी कीमत मात्र 50 पैसे है। इसके अलावा चार सेमी चौड़ी व सात सेमी लंबी 256 पृष्ठ की पॉकेट गीता कोड संख्या 1392 यहां पर सात रुपये में है तो पांच किलो की 2609 पृष्ठों की लंबी-चौड़ी पुस्तक भी यहां कोड संख्या-5 में 375 रुपये में उपलब्ध है।

50 पैसे से लेकर 375 रुपये तक में उपलब्ध

गीता प्रेस के स्टॉल पर युवाओं की खासी भीड़ देखी जा रही है। स्टॉल के संचालक सघन लाल पांडेय के अनुसार, गीता की बिक्री लगातार बढ़ती जा रही है, अब नई पीढ़ी भी इस अद्भुत ग्रंथ की महिमा को मान चुकी है। मेले की शुरुआत के दूसरे दिन तक करीब दो लाख गीता बिक चुकी है। इस बार जबर्दस्त रिस्पांस है।

स्टॉल पर गीता की बिक्री कर रहे प्रकाश का कहना है कि गीता संग्रह के अलावा ताबीज में पिरोए जाने वाले एक पेज में गीता संग्रह और पॉकेट गीता की मांग ज्यादा है, हालांकि गीता के इस रूप में पता लोगों का यहां आकर ही चलता है।

50 पैसे से लेकर 375 रुपये तक कीमत की किताबों में खास बात यह है कि सभी में पूरे 18 अध्याय और 700 श्लोक है। सब में श्लोकों की व्याख्या का तरीका अलग-अलग दिया गया है।

गीता के प्रति लोगों की बढ़ती मांग के चलते ही पिछले कुछ वर्षों से बंद गीता संग्रह को भी फिर से शुरू किया गया है जो गीता के 25 रूपों का मिश्रण है। चारों वेद एक में: पत्रिका प्रकाशन के पास उपलब्ध शब्द वेद मेले में आने वाले लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह शब्द वेद चारों वेदों को अपने में समाए हुए है।
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युवाओं ने जमाया मेला, ग्रुप में पहुंचे प्रगति मैदान

सप्ताह का पहला कामकाजी दिन होने की वजह से पुस्तक मेले में युवाओं की खासी भीड़ जुटी। प्रगति मैदान के सभी हॉल में ग्रुप में युवा अपनी जरूरत की पुस्तकें पलटते दिखे। धार्मिक पुस्तकों के साथ इनकी दिलचस्पी बाल उपन्यास, विषय से जुड़ी पुस्तकों और ई-बुक में दिखी।

मेले में उर्दू का इकलौता स्टॉल गजल और शायरी प्रेमियों का पसंदीदा बना हुआ है। यहां उर्दू अकादमी की पुस्तकों की बिक्री हो रही है। अकादमी के एक प्रतिनिधि ने बताया कि इस वर्ष पाठकों में शायरी और गजलों की मांग बढ़ी है। लोगों में गालिब की गजल और शायरी का क्रेज पहले जैसा बरकरार है। वहीं अकादमी की इस वर्ष की नई किताब ‘दिल्ली का पुरातन इतिहास’ पाठक हाथोंहाथ ले रहे हैं।

आयोजकों के मुताबिक, वीकेंड के बाद मेले में अमूमन दर्शकों की संख्या कम हो जाती है। इस दौरान स्कूली बच्चों के साथ युवा ज्यादा आते हैं। अभी तक पाठकों का रिस्पांस बेहतर रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में अभी तक मेले में लोगों की संख्या ज्यादा रही है। उम्मीद है कि पिछले साल की तुलना में इस साल का कारोबार अच्छा रहेगा।

मेले में आज
-हॉल नंबर-8 का ऑडिटोरियम में सुबह 11:00 बजे से एक बजे के बीच बचपन सोसाइटी फॉर लिटरेचर और कल्चर की तरफ से पुस्तकों से मंच पर संत विषय पर गोष्ठी।
-हॉल नंबर-8 में लिफि पब्लिकेशन की तरफ से पुस्तक का विमोचन, 6:30-8:00 बजे के बीच।
-हॉल नंबर-8 में डायमंड पॉकेट बुक्स की तरफ से पुस्तक का विमोचन, चार से छह बजे के बीच।
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