हरियाणा के भाजपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार स्कूली बच्चों को ‘गीता’ का पाठ पढ़ाना नए सत्र में सिरे नहीं चढ़ पाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल से लेकर शिक्षा मंत्री प्रोफेसर रामबिलास शर्मा तक सभी नए सत्र में ‘गीता’ पढ़ाने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन हकीकत में इसे शामिल नहीं किया गया है। नई छपी किताबों में यह पाठ्यक्रम का हिस्सा ही नहीं है। इस वजह से छात्रों को ‘गीता’ का पाठ पढ़ने के लिए अब अगले सत्र का इंतजार करना पड़ेगा।
दरअसल, छात्रों को नैतिक शिक्षा देने के लिए हरियाणा के भाजपा सरकार ने इस सत्र से स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक ‘गीता’ का पाठ पढ़ाने का निर्णय लिया था। सर्वशिक्षा अभियान के तहत छात्रों को पहली से आठवीं तक मिलने वाली मुफ्त किताबें छपकर तैयार हो गई हैं। इसे प्रदेश के विभिन्न जिलों में बांटने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
वहीं, छात्रों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने वाला महकमा एससीईआरटी (राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद्) द्वारा इसे सिलेबस में अभी तक शामिल नहीं किया गया है। अभी महज शिक्षा निदेशालय की मांग पर प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है, जबकि नए सत्र के लिए सिलेबस छपने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो रहा है।
शिक्षा निदेशालय नहीं मिले आदेश
मुख्यमंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री मौखिक तौर पर ‘गीता’ को पढ़ाने की घोषणाएं करते रहे, लेकिन लिखित तौर पर किसी तरह का कोई आदेश शिक्षा मंत्रालय द्वारा शिक्षा निदेशालय और शिक्षा निदेशालय द्वारा एससीईआरटी और माध्यमिक शिक्षा विभाग को नहीं दिया गया। सत्र करीब आते देख आनन फानन में 20 फरवरी को एससीईआरटी को पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने को कहा गया। महज दो दिन में एससीईआरटी की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा निदेशालय भेजा गया। देर से आदेश आने की वजह से सिलेबस भी तैयार नहीं हो पाया। जब तक कक्षा अनुसार ‘गीता’ का पाठ्यक्रम तैयार होता, उससे पहले एक अप्रैल से नया सत्र को ध्यान में रखकर शिक्षा विभाग ने सर्वशिक्षा अभियान के तहत मुफ्त मिलने वाली किताबों को प्रकाशित कराने का टेंडर दे दिया। अब किताबें छपकर भी आ गईं।
प्रस्ताव तैयार, लेकिन पाठ्यक्रम पूरा नहीं
एससीईआरटी की ओर से ‘गीता’ को पढ़ाने के लिए केवल प्रस्ताव तैयार करके भेजा गया है। पूरा पाठ्यक्रम तैयार नहीं है। पहली से पांचवीं कक्षा तक 5-5 श्लोक और छठी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए 10-15 श्लोक पढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अधिकतर दो-दो लाइन के श्लोक हैं, ताकि छात्रों को समझने में दिक्कत न हो। एससीईआरटी द्वारा ‘गीता’ पढ़ाने का प्रस्ताव तैयार कराने वाली कमेटी की प्रमुख संयुक्त निदेशक किरण का कहना है कि श्लोक के नीचे हिंदी में उसका विश्लेषण भी दिया गया है। जल्दी की वजह से अभ्यास प्रश्न नहीं भेजा जा सका। लेकिन अभ्यास प्रश्न तैयार कर लिया गया है। अधिकतर श्लोक ज्ञान और कर्मयोग अध्याय से लिए गए हैं।
गीता का प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा हुआ है। पहली से आठवीं तक की किताबें छप चुकी है। अभी तक सरकार से मंजूरी नहीं मिली है। अब आगे जो आदेश होगा, उसके अनुरूप काम किया जाएगा।
-एमएल कौशिक, निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग
निजी स्कूलों में ‘गीता’ और ‘महाभारत’ की क्लास
प्रदेश सरकार भले ही इस सत्र से सरकारी स्कूलों में ‘गीता’ का पाठ्यक्रम लागू नहीं कर सकी हो, लेकिन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध निजी स्कूलों में इसी सत्र से ‘गीता’ और ‘महाभारत’ की क्लास लगेगी। स्कूलों ने छात्रों को नैतिकता और कर्म का पाठ पढ़ाने के लिए एक अप्रैल से शुरू होने वाली क्लास के लिए यह व्यवस्था की है।
दरअसल, अभी तक स्कूलों में सुबह प्रार्थना के वक्त नैतिकता की बातें और धर्म से जुड़ी शिक्षा दी जाती थी, लेकिन वक्त के साथ युवाओं में नैतिकता की कमी को मद्देनजर रखते हुए निजी स्कूलों ने अपने स्तर पर ‘गीता’ और ‘महाभारत’ की क्लास की व्यवस्था की है, ताकि विद्यार्थी धर्म और कर्म की अच्छी बातें आदतों में शामिल कर सकें और ताउम्र उनकी जिंदगी का हिस्सा बनी रहें।
निजी स्कूलों में छठीं से आठवीं तक हिंदी विषय के साथ छात्रों को धर्म शिक्षा का पाठ शुरू किया गया है। वैदिक ट्रस्ट और अन्य संस्थाओं से जुड़े स्कूलों में अलग से धर्म शिक्षा की पुस्तक शामिल की गई है। सभी किताबें प्राइवेट प्रकाशकों की हैं। इसमें गीता, महाभारत के कुछ अंशों के साथ स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी श्रद्धानंद, महर्षि दयानंद सरस्वती समेत कई महापुरुषों की जीवनी और उनकी सीख को शामिल किया गया है।
छात्रों को सिखाया नैतिकता का पाठ
निजी स्कूलों में कक्षा छह के विद्यार्थियों के लिए ‘बाल रामकथा’ पुस्तक मौजूद है। इसमें पुरुषोत्तम राम की जीवन का संक्षिप्त परिचय को सीख के साथ कहानी के रूप में डाला गया है। इसमें अवधपुरी में राम, दो वरदान, चित्रकूट में भरत, दंडक वन में 10 वर्ष से लेकर लंका विजय तक और राम का राज्याभिषेक तक का जिक्र किया गया है। इसके माध्यम से छात्रों को अच्छाई और बुराई के प्रतीक के बारे में बताया जाएगा।
कक्षा सात में ‘बाल महाभारत कथा’ पुस्तक पढ़ाई जाएगी। इसके माध्यम से छात्रों को भीष्म प्रतिज्ञा के जरिए दृढ़ निश्चय, पांडवों की रक्षा, मायावी सरोवर, प्रतिज्ञा-पूर्ति, महाभारत युद्ध के बारे में पढ़ाया जाएगा।
कक्षा आठ में ‘भारत की खोज’ पुस्तक के जरिये छात्रों को आर्यों के आगमन, प्राचीनतम अभिलेख, धर्म ग्रंथ, पुराण, वेद, गीता, भारतीय संस्कृति की निरंतरता, उपनिषद्, भौतिकवाद के बारे में बताया जाएगा। इन पाठों के जरिये भारतीय संस्कृति के ज्ञान के साथ उनमें नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाएगा।
स्कूलों में छठीं से आठवीं तक हिंदी के साथ नैतिक शिक्षा देने के लिए रामायण, महाभारत पढ़ाई जाएगी। सप्ताह में एक दिन स्पेशल क्लास लगेगी। छात्रों को इससे ज्ञान और संस्कारवान बनने में मदद मिलेगी।
-कर्नल प्रताप, प्रदेश सचिव, हरियाणा स्कूल प्रोग्रेसिव कांफ्रेंस
छात्रों की वैल्यू एजुकेशन पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए 20 गतिविधियां भी निर्धारित की गई हैं। सप्ताह में एक दिन स्पेशल क्लास में छात्रों पर अच्छी बातें सीखने का जोर दिया जाएगा।
-अंजली नागपाल, प्रिंसिपल, ब्लू बेल्स पब्लिक स्कूल