हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई गाजियाबाद की मतदाता सूची से भी पता चलता है कि जिले में लड़कियों की संख्या लड़कों के सापेक्ष काफी कम है।
नई जारी मतदाता सूची में करीब चालीस हजार ऐसे युवाओं केवोट बनाए गए हैं, जिनकी उम्र 18-19 के बीच की है। इनमें लड़के-लड़कियों की संख्या में भारी अंतर है। लोनी विधानसभा क्षेत्र की जारी सूची में कुल बनी 5712 वोट में से लड़कियां की संख्या मात्र 1606 है।
इसी प्रकार मुरादनगर क्षेत्र में 7175 में से 2741, साहिबाबाद में 10387 में से 3441, गाजियाबाद में 6460 में से 2308 और मोदीनगर विधानसभा क्षेत्र में बनी 9243 वोट में से मात्र 3285 वोट युवतियों की हैं।
कुल मिलाकर लोकसभा क्षेत्र की इन पांचों विधानसभा में 18-19 साल की उम्र की बनी कुल वोट 39977 हैं। इनमें से मात्र 13381 युवतियां हैं।
बागपत, गाजियाबाद और मेरठ में लगातार ‘बिटियां’ की संख्या कम होती जा रही है। मंडलीय समीक्षा में इसका खुलासा हुआ है। सबसे खराब हालत बागपत की है, जबकि गाजियाबाद दूसरे और मेरठ तीसरे नंबर पर है। अधिकारी इसक कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार की कमी बता रहे हैं।
लगातार घट रही गर्ल्स चाइल्ड ने कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के सभी सरकारी दावों की हवा निकाल दी है। सरकारी मशीनरी की कार्रवाई, अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर छापेमारी, सेंटर्स की सीलिंग और कडे़ नियमों के बावजूद भी लिंगानुपात में गाजियाबाद काफी पीछे है।
सबसे शर्मनाक स्थिति बागपत जिले की है। गर्ल्स रेश्यो के मामले में मंडल में बुलंदशहर की स्थिति कुछ अच्छी है, लेकिन उसमें भी लड़कियां भी 1000 लड़कों के सापेक्ष 900 का आंकड़ा नहीं छू पाई हैं।
लिंगानुपात के आंकड़े
जिला पुरुष/महिला
बागपत 1000/847
गाजियाबाद 1000/851
मेरठ 1000/854
नोएडा 1000/856
बुलंदशहर 1000/862