दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क में एक मां अपनी 13 साल की बच्ची को स्कूल से वापस ले आई और उसे दोबारा स्कूल नहीं जाने दिया। बच्ची के पिता ने उसे दोबारा स्कूल भेजने के लिए न्यायालय की शरण ली।
शिकायत मिलते ही दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन वकीलों की एक कमिटी बनाई। रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि बच्ची के लिए तत्काल बोर्डिंग स्कूल का प्रबंध किया जाए। यह बात चौंकाने वाली है कि बच्ची के मां-बाप के होते हुए भी उसे बोर्डिंग स्कूल भेजने का निर्देश दिया गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्देश दिया कि लड़की के लिए बोर्डिंग स्कूल का इंतजाम दिल्ली के नजदीक ही किया जाए।
गौरतलब है कि 16 सितंबर को जस्टिस मनमोहन ने इस केस के लिए दिल्ली गवर्नमेंट काउंसिल की रूचि सिंदवानी, एडवोकेट अशोक अग्रवाल और एडवोकेट राजशेखर राव को बच्ची की देख-भाल के लिए नियुक्त किया। बच्ची के मां-बाप 2005 में अलग हो गए थे। फिलहाल बच्ची अपनी मां के साथ रहती है।
कोर्ट ने कहा कि बच्ची के लिए नजदीक में ही एक बोर्डिंग स्कूल का प्रबंध किया जाए जिससे कि उसकी आगे की पढ़ाई जारी रखी जा सके। मां द्वारा स्कूल जाने से रोके जाने के बाद लंबे समय से वह स्कूल नहीं गई है।