न उसके साथ रेप हुआ है और न ही वह नेत्रहीन है। ऐसे में डीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को मामले की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए।
तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम सदर ने मामले में सात लोगों के बयान लिए। इसमें बाल कल्याण समिति की दो सदस्यों ने लिखित में कहा कि 13 अप्रैल को जब बालिका कार्यालय आई तो वो खुद कुर्सी से उठकर बिना किसी का सहारा लिए सीढ़ियों से उतर कर नीचे गई थी।
उस वक्त उन्होंने सीडब्ल्यूसी की काउंसलर से यह बात कही थी लेकिन उनके कथन पर ध्यान नहीं दिया। यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि दोनों सदस्यों ने कहा कि अधिकतर हम दोनों सदस्यों की सर्वथा उपेक्षा की जाती है।
मामले में सीडब्ल्यूसी की तीनों सदस्या, काउंसलर नीरू, चाइल्ड लाइन के समन्वयक आरिफ खान व काउंसलर सृष्टि त्यागी के साथ आशा ज्योति केंद्र की केस वर्कर प्रियांजली मिश्रा का भी बयान दर्ज किया गया, जिनमें काफी विरोधाभास मिला।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सीडब्ल्यूसी में बच्चों के साथ अभद्रता व अमानवीय व्यवहार किया जाता है, जिसके आधार पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने जांच रिपोर्ट में सीडब्ल्यूसी की सदस्या शालिनी सिंह, केस वर्कर प्रियांजली मिश्रा, सृष्टि त्यागी व आरिफ खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की है।