सर गंगाराम अस्पताल में पाकिस्तान से आए 14 माह के बच्चे का मुश्किल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया। बच्चे के दिल के ऊपरी भाग (लेफ्ट एट्रियम) काफी बढ़ा हुआ था। अस्पताल के डॉक्टरों की इस कामयाबी को दी एनल्स ऑफ थोरेसिक सर्जरी में प्रकाशित भी किया गया है।
बाल हृदय शल्य चिकित्सा विभाग के चेयरमेन डॉ. राजा जोशी ने बताया कि बच्चे में लेफ्ट एट्रियम की मात्रा 87 मिलीलीटर थी जबकि सामान्य मात्रा बच्चों में 12-20 मिलीलीटर होती है। इस उम्र के बच्चों में यह सबसे बड़ा लेफ्ट एट्रियम रिपोर्ट किया गया है।
बच्चे को बार-बार छाती में संक्रमण और सांस लेने में तकलीफ के कारण शारीरिक विकास बाधित हो रहा था। अस्पताल में भर्ती के समय केवल 6.5 किलोग्राम वजन था। प्रारंभिक जांच के दौरान ईको और ईसीजी की मदद से उसके दिल की परेशानी को समझा गया।
दिल में छेद और वाल्व भी हो रहा था लीक
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज अग्रवाल ने बताया कि दिल की जांच में पता लगा कि बाईं तरफ का दिल फैला हुआ है। लेफ्ट एट्रियम सांस की नली पर सीधे दबाव बना रहा था। इसके कारण सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हो रही थी। इसके अलावा बच्चे को दिल में बड़ा छेद भी था (वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता है) और बाएं तरफ का वाल्व भी लीक हो रहा था।
ऐसे चली सर्जरी की प्रक्रिया
बच्चे की एक जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी की गई। पहले चरण में ओपन हार्ट सर्जरी से छेद बंद किया गया। वाल्व की मरम्मत की गई और जायंट लेफ्ट एट्रियम (जीएलए) के आकार को घटाकर कम किया गया।
ऑपरेशन के बाद रोगी को ऑपरेटिंग रूम में डॉ. रीना जोशी की अध्यक्षता में एनेस्थिसिया टीम द्वारा ऑपरेशन के तुरंत बाद ही एक्सट्यूब किया गया और रोगी को 7 वें दिन छुट्टी दे दी गई। फिलहाल बच्चा स्वस्थ है।