हालांकि, यह तकनीक पहले बेहद महंगी थी, जिसमें सेंसर की कीमत एक करोड़ तक होती थी और इसे संचालित करने के लिए मानवयुक्त विमान की आवश्यकता होती थी। अभिषेक की टीम ने स्वदेशी समाधान विकसित करके इस लागत को केवल 25 लाख रुपये तक कम कर दिया है और इसे भारतीय ड्रोन में एकीकृत किया है।
एलआई-कॉप्टर ब्रांड वाले ये ड्रोन निम्नलिखित परियोजनाओं में उपयोग किए जा रहे हैं
- रेलवे और सड़क निर्माण।
- पावर लाइन निरीक्षण।
- खदान मानचित्रण और निगरानी।
- जनजातीय स्कूलों के लिए भूमि और संपत्ति प्रबंधन।
इसके अलावा, एलआई-कॉप्टर कृषि जल प्रबंधन, शहरी बाढ़ आपदा प्रबंधन और सोलर रूफटॉप आकलन जैसी समस्याओं को हल कर रहा है। अभिषेक कहते हैं, '2047 तक विकसित भारत के लिए जल प्रबंधन प्राथमिक आवश्यकता है। हम एलआईडीएआर तकनीक का उपयोग करके जल प्रवाह का सिमुलेशन करेंगे, पुराने जल मार्गों की पहचान करेंगे और पूरे भारत में जल उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।'
10 युवा उद्यमियों में हासिल किया स्थान
अभिषेक की इस उपलब्धि ने उन्हें युवा मामलों के मंत्रालय द्वारा चुने गए 10 युवा उद्यमियों में स्थान दिलाया है। उन्होंने 1 लाख युवा उद्यमियों का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। अभिषेक ने कहा कि 'मैंने उन्हें बताया कि हमारी कंपनी मेक इन इंडिया अभियान के तहत इस उन्नत एलआईडीएआर तकनीक को विकसित करने वाली भारत की पहली कंपनी है। प्रधानमंत्री ने युवाओं के इस योगदान पर गर्व जताया।' अभिषेक ने यह भी बताया कि यह तकनीक बाढ़ और सूखे जैसी समस्याओं को हल करने में कैसे मदद कर सकती है। यह बात प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत के विजन से मेल खाती है।
इस सम्मान के हिस्से के रूप में, अभिषेक उन 60 लोगों में शामिल थे जिन्हें प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोपहर के भोजन का मौका मिला। उन्होंने इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ (चंद्रयान के निर्माता) और बंगलूरू के सांसद तेजस्वी सूर्या जैसे प्रमुख व्यक्तियों से समक्ष भी विचार रखे। अभिषेक ने कहा, 'यह अनुभव प्रेरणादायक और प्रोत्साहित करने वाला था। इसने मेरे विश्वास को मजबूत किया कि भारत तकनीकी नवाचारों के लिए तैयार है।' अभिषेक की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत के युवा चुनौतियों को अवसरों में बदलकर राष्ट्र के उज्जवल भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।