गाजियाबाद/साहिबाबाद। शहर के प्राचीन दूधेश्वरनाथ मंदिर भव्यता देने के लिए प्रस्तावित कॉरिडोर का निर्माण कार्य रफ्तार नहीं पकड़ रहा। एम्स सेटेलाइट सेंटर की बात भी जमीन चिह्नीकरण से आगे नहीं बढ़ पाई है। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली इन दोनों परियोजनाओं की फाइलें शासन में अटकी हैं।
दूधेश्वरनाथ कॉरिडोर बनाने की घोषणा वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री ने की थी। इसके पहले चरण में मंदिर में हॉल और द्वार बनाने का कार्य कर लिया गया है। कॉरिडोर के लिए नगर निगम की ओर से यहां 40 दुकानों को शिफ्ट किया जाना है। सड़कों को चौड़ा कर मंदिर के आसपास सुविधाओं का विकास होना है। सड़क चौड़ीकरण के लिए दुकानों का सर्वे काफी पहले कर लिया गया था। कॉरिडोर का नक्शा भी तैयार है, लेकिन शासन से हरी झंडी नहीं मिलने के चलते कार्य ठंडे बस्ते में है।
इसी तरह जिले में एम्स का सेटेलाइट सेंटर बनाने की घोषणा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सितंबर 2024 में की थी। इसके बाद आवास विकास परिषद ने मार्च 2025 में हुई बोर्ड बैठक में इस सेंटर के लिए वसुंधरा के सेक्टर-7 में अपनी 10 एकड़ जमीन चिह्नित करके प्रस्ताव भेज दिया था। आठ माह बीतने के बाद भी इस दिशा में अगला कदम नहीं बढ़ पाया है। सेटेलाइट सेंटर में ओपीडी में इलाज, मरीजों को एम्स रेफर करने समेत अन्य सुविधाएं मिलनी हैं। इस सेंटर से न केवल गाजियाबाद बल्कि आसपास के जिलों के लोगों को भी लाभ मिल सकता है। आवास विकास परिषद के अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तला ने बताया कि दिल्ली एम्स का सेटेलाइट सेंटर बनाने के लिए करीब 487 करोड़ की जमीन दी गई है। मुख्यालय की तरफ से इस संबंध में राज्य सरकार व एम्स की टीम को बताया जा चुका है।
ग्रेटर गाजियाबाद की रिपोर्ट भेजी गई
ग्रेटर गाजियाबाद को आकार देने की कवायद भी धरातल पर जल्द उतरती नहीं दिख रही। इसको लेकर शुरुआत में सभी महकमों ने तेजी दिखाई। लोनी, खोड़ा और मुरादनगर के 21 गांवों का सर्वे करते हुए उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज दी। इसके बाद से मामला अधर में है। अधिकारियों का दावा है कि शासन से हरी झंडी मिलते ही कार्य को तेजी से पूरा किया जाएगा।
बोले अधिकारी- हरी झंडी मिलते ही पूरा होगा काम
दूधेश्वरनाथ कॉरिडोर के लिए दुकानों और सड़कों के सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। इसकी रिपोर्ट और कॉरिडोर के नक्शे को तैयार कर लिया गया है। वहीं, ग्रेटर गाजियाबाद के सर्वे की रिपोर्ट को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। शासन की ओर से झंडी मिलते ही तेजी से कार्य पूरा किया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह मलिक, नगर आयुक्त
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