गाजियाबाद। सर्दी का मौसम जहां एक ओर ठिठुरन और शारीरिक सुस्ती लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। खासकर अवसाद से जूझ चुके मरीजों के लिए यह मौसम परेशानी बढ़ाने वाला साबित हो रहा है। एमएमजी अस्पताल में बीते कुछ समय में अवसाद के पुराने मरीजों की संख्या में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मरीज उदासी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, थकान और मन न लगने जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।
एमएमजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. साकेतनाथ तिवारी बताते हैं कि सर्दी के मौसम में शरीर में न्यूरोलॉजिकल बदलाव होते हैं। इस दौरान सेरोटोनिन हार्मोन का स्राव कम हो जाता है, जो मूड को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके साथ ही कार्टिसोल हार्मोन का संतुलन भी बिगड़ने लगता है। इन बदलावों का सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है और मरीजों में अवसाद के लक्षण दोबारा उभरने लगते हैं।
कई मरीज घर से बाहर निकलना कम कर देते हैं, इससे सामाजिक संपर्क घटता है और दवाइयों का असर भी अपेक्षाकृत कम महसूस होने लगता है। एमएमजी अस्पताल के मनप्रकोष्ठ की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. चंदा यादव का कहना है कि सर्दी में कई मरीज सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी) से प्रभावित हो जाते हैं। दिन छोटे होने, धूप कम मिलने और दिनचर्या बिगड़ने के कारण मरीज असहज महसूस करने लगते हैं। इसका असर नींद, भूख और सोचने समझने की क्षमता पर पड़ता है। यदि समय पर काउंसलिंग और इलाज न मिले तो समस्या गंभीर रूप ले सकती है। नियमित रूप से योगासान करें और धूप में बैठें। पानी पर्याप्त पीएं।
सर्दी बढ़ने के साथ ही बढ़ी उदासी और बेचैनी
राजनगर एक्सटेंशन के 38 वर्षीय इंजीनियर पिछले तीन साल से अवसाद का इलाज करा रहे हैं। गर्मियों में उनकी स्थिति काफी हद तक सामान्य हो जाती है, लेकिन सर्दी शुरू होते ही उन्हें फिर से बेचैनी और उदासी घेर लेती है। इंजीनियर ने डॉक्टर को बताया कि ठंड में उनका मन किसी काम में नहीं लगता, नींद भी ठीक से नहीं आती और वे लोगों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं। हाल ही में हालत बिगड़ने पर वे दोबारा एमएमजी अस्पताल पहुंचे, जहां दवाइयों के साथ काउंसलिंग शुरू की गई।
इलाज बंद होने के बाद सर्दी में शुरू हुई परेशानी
लोहिया नगर निवासी 45 वर्षीय महिला गृहिणी हैं। वह पहले से ही अवसाद की मरीज रही हैं, ढाई साल तक चले इलाज के बाद वह सामान्य हो गई थीं। सर्दी बढ़ने के साथ ही उन्हें लगातार थकान, निराशा और डर महसूस होने लगा। वे दिनभर घर में ही रहती थीं और किसी से बात करने का मन नहीं करता था। परिवार के समझाने पर वे अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टर ने बताया कि समय रहते इलाज मिलने से उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार हो रहा है।
टेलीमानस हेल्पलाइन पर करें फोन
मनप्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता का कहना है कि सर्दी के मौसम में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी है। नियमित धूप लेना, हल्का व्यायाम, संतुलित आहार और सामाजिक संपर्क बनाए रखना अवसाद के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है। साथ ही, किसी भी तरह की परेशानी महसूस होने पर बिना देर किए टेली मानस हेल्पलाइन 14416 पर संपर्क करें। डॉक्टर निशुल्क काउंसिलिंग करेंगे, जरूरत पड़ने पर एमएमजी अस्पताल में बुलाकर दवाई की सलाह देंगे।