गाजियाबाद। तमाम शिकायतों और दावों के बावजूद पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा। शहर के अधिकांश इलाकों में आपूर्ति हो रहा पानी पीने योग्य नहीं है। यह हकीकत नगर निगम की ओर से शहर में पानी की जांच के लिए निकली टीमों ने भी देखी। पिछले तीन दिन में पांच जोन में 90 स्थानों पर पानी में क्लोरीन की मात्रा मानक से कम मिली है। अब जलकल विभाग ने इसको लेकर कार्रवाई शुरू की है।
इंदौर में दूषित जलापूर्ति से कई लोगों की मौत के बाद अमर उजाला शहर में पानी की समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित कर रहा है। इस कड़ी में नगर निगम के जलकल विभाग ने पांचों जोन में पानी की जांच के लिए चार-चार लोगों की टीम उतारी है। ये टीमें घर-घर जाकर पानी की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, रविवार से मंगलवार तक 300 स्थानों पर किट के माध्यम से पानी में क्लोरीन की जांच की गई। इस दौरान 210 स्थानों पर ही क्लोरीन की मात्रा ठीक मिली। शेष स्थानों पर क्लोरीन 0.1 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पाई गई। मानक के अनुसार, सामान्य पानी में 0.2 से 0.5 मिलीग्राम क्लोरीन प्रति लीटर होनी चाहिए।
तीन विभाग, एक कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी : पानी की जांच के लिए उतारी गई टीमों में जलकल विभाग, जल निगम, सफाई एवं खाद्य सुरक्षा विभाग और शहर में सीवरेज व्यवस्था देखने वाली कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। इनको नगर आयुक्त ने सभी जोन में जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। अभियान के तहत नगर निगम सीमा में लगे नलकूप, हैंडपंप, टंकियों की जांच की जाएगी।
यहां कम मिली क्लोरीन
विजयनगर, इंदिरापुरम, कैलाभट्ठा, प्रताप विहार, सेन विहार, वसुंधरा, वैशाली, मोहननगर आदि।
बीमार कर सकता है ऐसा पानी
घरों में आपूर्ति से पूर्व जलकल विभाग पानी में क्लोरीन डालता है। इससे उसमें हानिकारक बैक्टीरिया नहीं पनपते। एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. संतराम वर्मा ने बताया कि पानी में क्लोरीन की मात्रा कम होने से बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इससे टाइफाइड, हैजा, पेचिश जैसे जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।