‘वादे तोड़ने के लिए ही होते हैं’ ये जुमला हमारे राजनेताओं पर फिट बैठता है। प्यार के महीने में चुनाव अपने चरम पर है। यह संयोग ही है कि इस बार ‘प्रॉमिस डे’ 11 फरवरी को यानी मतदान के दिन ही है। इस बार जनता से किए वादे की अहमियत नेता जी को पता लगेगी।
लोग प्रॉमिस डे पर वोट कर वादा निभाएंगे लेकिन नेता जी को चेतावनी भी देंगे कि आप वादा मत तोड़ देना क्योंकि वादा टूटा तो उन्हें दिल पर चोट महसूस होगी, दर्द भी हदें पार कर जाएगा।
प्रॉमिस डे पर वोट लेकर विधायक बनने वाले प्रत्याशी चुनाव के दौरान किए वादे निभाने ही होंगे। लोगों ने तय किया है प्रॉमिस डे से पहले प्रत्याशियों से वादा लिया जाएगा कि वे समस्याओं का संपूर्ण खात्मा करेंगे।
समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्हें प्रॉमिस डे की याद दिलाई जाती रहेगी। प्रत्याशी हर चुनावों में विकास का वादा करता हैं। 24 घंटे बिजली, पानी, सड़क की सुविधा देने का आश्वासन दिया जाता है लेकिन विधायक बनते ही वादों को भूल जाते हैं।
अगर ऐसा नहीं होता तो गाजियाबाद आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए नहीं तरस रहा होता। मतदाता अब जागरूक है और प्रॉमिस डे पर प्रत्याशियों से ठोस वादा लेगा।
आरडब्ल्यूए फेडरेशन के चेयरमैन तेजेंद्र पाल त्यागी ने बताया कि विकास के मुद्दों को महत्व देने वाले प्रत्याशी को ही वोट दिया जाएगा। जो गाजियाबाद को स्मार्ट बनाने का वादा करेगा, उसी को वोट जाएगा। शहर की जनता को बुनियादी समस्याओं से निजात चाहिए।
प्रत्याशियों को करने होंगे ये वादे
- जनता के लिए बनने वाली योजनाओं में जनता की राय लें।
- कार्यकाल के दौरान अपनी चल अचल संपत्ति को सार्वजनिक करें।
- पार्टी के साथ देश और जनता को महत्व दें।
- युवाओं सहित हर तबके की सुविधाओं का ख्याल रखें
- स्थानीय स्तर के हर मुद्दे को सुलझाने का कार्य करें।
- शहर में परिवहन, सुरक्षा, स्वच्छ पर्यावरण, सड़क, बिजली की सुविधा सुनिश्चित करें।