वोट करना संवैधानिक हक है लेकिन गाजियाबाद में 85 फीसदी साक्षरता के बावजूद यहां शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण मतदाता लोकतंत्र के पर्व में अधिक बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। यह बात और है कि हमारे और आपके हक के लिए मतदान करने की मुहिम भले ही सरकारी स्तर पर बड़े स्तर पर चलाई जाती है,
मगर यह भी एक कड़वा सच है कि अपने इस हक को शहरी मतदाताओं के मुकाबले ग्रामीण मतदाता अच्छी तरह से पहचानते हैं। यही कारण है कि ज्यादातर शहरी मतदाता जहां मतदान से पूर्व ही परिवार के साथ हॉलीडे की प्लानिंग करते हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोग लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़ चढ़कर भाग लेते हैं।
शहरी मतदाताओं की उदासीनता के चलते ही हर बार गाजियाबाद में मतदान का प्रतिशत कम ही रहता है। सिर्फ एक बार ही यहां 2012 में मतदान का प्रतिशत 54 फीसदी तक पहुंच सका था। 2002 में गाजियाबाद शहरी क्षेत्र में सिर्फ 30.55 फीसदी ही मतदान हुआ था जबकि मुरादनगर में यह आंकड़ा 49 और मोदीनगर में 47.82 फीसदी तक रहा था।
इसी प्रकार वर्ष 2007 में गाजियाबाद शहर में मतदान सिर्फ 33.03 प्रतिशत ही रहा था, जबकि मुरादनगर में यह आंकड़ा 52.80 और मोदीनगर में 48.01 फीसदी रहा। खास बात यह भी है कि गाजियाबाद की कुल साक्षरता दर 85 प्रतिशत है। इसके बाद भी पढ़े लिखे लोग लोकतंत्र के पर्व को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी निधि केसरवानी ने बताया कि मतदान के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान अभी भी जारी है। इनमें मुख्य रूप से रॉक बैंड, गाने के जरिए, जगह-जगह बैलून लगाकर, युवाओं को रिझाने के लिए बाइक रैली, स्कूल की रैलियां, कॉलर ट्यून एसएमएस के जरिए,
झांकियां निकालकर, अभिभावकों के वोट देने पर बच्चों के मार्क्स बढ़ाने से लेकर कई उपाय किए गए हैं।
इनसेट:
बीते विधानसभा चुनावों में कहां कितनी वोटिंग
वर्ष गाजियाबाद मुरादनगर मोदीनगर लोनी साहिबाबाद
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1977 45.29 56.2 47.66
1980 40.63 41.05 43.07
1985 45.99 47 46.84
1989 42.77 54.01 52.50
1991 45.18 50.10 53.45
1993 54.08 59.91 56.76
1996 37.27 56.43 52.05
2002 30.55 49 47.82
2007 33.03 52.80 48.01
2012 54.08 62.34 62.61 60.16 49.31