गाजियाबाद। रणजी व अंडर-19 में खिलाने के नाम पर युवाओं से साढ़े 12 लाख की ठगी करने वाले विकास डागर को नंदग्राम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। विकास के खिलाफ गाजियाबाद में दो और दिल्ली के थाना ईओडब्ल्यू में भी ठगी का एक मुकदमा दर्ज है। आरोपी को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया, जहां से उसको जेल भेज दिया गया।
एसीपी नंदग्राम रवि कुमार ने बताया कि टीला मोड़ निस्तौली निवासी विकास डागर ने मोरटी गांव के पास किराये पर स्टेडियम ले रखा था। वहां वह युवाओं को मैैच की प्रैक्टिस कराता था। प्रसिद्धि और मोटी कमाई के लालच में युवा व उनके परिवार के कई लोग उसके प्रभाव में आ जाते थे। ऐसे लोगों को वह अपने झांसे में लेकर उनसे पैसा ऐंठ लेता था। दो खिलाड़ियों से उसने हाल ही में 12.50 लाख रुपये लिए थे।
बताया था 18 लाख का खर्च :
सोनभद्र के रेनूकूट स्थित हिंडालकोे कॉलोनी निवासी पवन कुमार ने बताया कि विकास डागर से उन्होंने 2020 में स्टेडियम में तैयारी करने के लिए संपर्क किया था। तभी विकास डागर ने कहा कि तुम बहुत अच्छा खेलते हो। नॉर्थ ईस्ट टीम की ओर से रणजी में खिलाने के लिए उनकी चयन समिति मेें अच्छी पैठ है। इसके लिए उनको 18 लाख रुपये देने होंगे। कहा कि रणजी में खेलकर उनको न केवल प्रसिद्धि मिलेगी बल्कि अच्छी कमाई होनी शुरू हो जाएगी।
उसकी बातों में आकर उसने आरोपी को पांच लाख रुपये दे दिए। आरोप है कि उनका किसी भी टीम में चयन नहीं हुआ और 2023 भी ऐसे ही निकल गया। आरोपी ने अपना नंबर बंद कर दिया और फिर मिलने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद उन्होंने नवंबर में नंदग्राम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके अलावा साढ़े सात लाख रुपये अन्य खिलाड़ी से भी विकास डागर ने ले लिए।
कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से बताए अपने संबंध :
पवन ने बताया कि विकास डागर ने उनसे कहा कि रणजी और अंडर-19 में ही नहीं, उसके संबंध बीसीसीआई के कई बड़े ओहदे के लोगों से हैं। यह तो केवल शुरूआत है, वह उनको अंतरराष्ट्रीय पटल पर लेकर जाएगा। कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ फोटो दिखाने के साथ उसने अपने संबंध भी बताए। इसके बाद वह उसके प्रभाव में आ गए और जैसे तैसे पैसे इंतजाम कर उसको दे दिया।
नए खिलाड़ियों को दे रहे झांसा :
नए खिलाड़ियों को राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के बहाने उनसे ठगी होने का यह पहला मामला नहीं है। इससेे पहले मुरादनगर, मोदीनगर, लोनी में भी ताइक्वांडो, वेटलिफ्टिंग समेत तमाम खेलों में विदेश भेजने के नाम पर भी ठगी हो चुकी है। खास बात यह है कि पूरा लेनदेन नकद ही होता है। इसलिए खिलाड़ी शिकायत भी करते हैं तो मामले में पुलिस के स्तर पर कार्रवाई नहीं हो पाती।