कपड़ों की फेरी लगाकर तलाशते थे कार
पुलिस पूछताछ में वाहन चोर गौरव ने बताया कि वह बाइक पर कपड़ों की फेरी लगाता था। इसी बहाने कालोनियों में घरों के बाहर खड़े वाहनों की रेकी करता है। वह ऐसे वाहनों को चिह्नित करता था, जो कई दिन तक एक ही जगह पर खड़े रहते थे।
एप से नंबर पता कर बना लेते थे फर्जी आरसी
एसीपी सुजीत राय ने बताया कि चोरी की कारों को बिहार, नेपाल और पंजाब में बेचा जाता था। यह गिरोह पुरानी कार बेचने वाले एप से किसी भी ऐसी कार का नंबर पता कर लेते थे जो नई हो। इसके बाद फिर उसी कार के नंबर से खुद फर्जी आरसी तैयार कर लेते थे। इसके आधार पर ही कार के चेसिस और इंजन नंबर भी बदल लिए जाते थे। प्रताप विहार से चोरी की गई बलेनो कार का सौदा उन्होंने छह लाख रुपये में कर दिया था।