भीख मांगने वाली गौरी ने परम सेवा संस्थान की मदद से शिक्षा प्राप्त की। कठिन हालातों के बावजूद उसने 10वीं में 60 फीसदी अंक हासिल कर सफलता की मिसाल पेश की।
रेलवे स्टेशन की भीड़ में कभी भीख मांगने वाली गौरी ने हालातों को मात देते हुए शिक्षा की राह पकड़ ली और अपने संघर्ष को सफलता में बदल दिया। स्लम से निकलकर उसने 10वीं कक्षा में 60 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी मेहनत और हौसले की मिसाल पेश की है।
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परम सेवा संस्थान की संचालिका परमजीत कौर ने बताया कि गौरी पहले शहर के रेलवे स्टेशन पर भीख मांगती थी। संस्था ने उसे समझाकर अपने साथ जोड़ा और पढ़ाई की शुरुआत कराई। गौरी ने यहां से पांचवीं तक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उसका दाखिला राकेश मार्ग स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में करवा दिया गया। वहां से उसने आठवीं तक की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद गौरी को राजकीय इंटर कॉलेज, विजय नगर में दाखिला दिलाया गया। इसी दौरान भूड़ भारत नगर से स्लम बस्ती को हटा दिया गया। इससे उसके परिवार को रहने की समस्या का सामना करना पड़ा। बाद में संस्था के प्रयासों से परिवार को फैजाबाद स्थानांतरित किया गया, जहां गौरी ने फिर से 10वीं कक्षा में प्रवेश लिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौरी ने पढ़ाई जारी रखी और 60 प्रतिशत अंक हासिल कर साबित किया कि हालात कितने भी मुश्किल हों, मेहनत और सही मार्गदर्शन से बदलाव संभव है।