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Ghaziabad News: ...आखिर किसकी पनाह में हैं भगोड़े कैश वैन लुटेरे

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गाजियाबाद। छह मई को नेशनल हाईवे नौ पर कैश वैन में डाका डालने वाले दो बदमाश वारदात के 14 दिन बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। परिजनों का दावा है कि दोनों युवक पुलिस की हिरासत में हैं।
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वहीं पुलिस दोनों लुटेरों को खोजने का दावा कर रही है। परिजनों ने अधिवक्ता के माध्यम से जिला जज कोर्ट में याचिका डाली है। इसमें वांछित दोनों बदमाशों के साथ मुठभेड़ की आशंका जताई है। ऐसे में सवाल यही है कि आखिर दोनों लुटेरे किसकी पनाह में हैं।
12 मई को मुठभेड़ के दौरान कैश वैन से 27 लाख रुपये लूटने के आरोपी जुबैर और समीर को पुलिस टीम ने मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया। जबकि लूट की योजना बनाने और डाका डालने में शामिल मोहम्मद कैफ और रिजवान को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। दो अन्य लुटेरे फिरोज और जुबैर का भाई शोएब भी मामले में वांछित हैं। पुलिस ने दोनों की गिरफ्तारी पर एक-एक लाख का इनाम घोषित कर रखा है।
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डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि वांछित दोनों लुटेरों की गिरफ्तारी के लिए चार टीमें लगाई गई हैं। दोनों बदमाश फिलहाल एक्टिव नहीं हैं, न मोबाइल प्रयोग कर रहे हैं और न ही कोई खरीदारी कर रहे हैं। जल्द ही दोनों वांछितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। मुठभेड़ में उठे सवाल, याचिका डाली : परिजनों का आरोप है कि शोएब और फिरोज पुलिस गिरफ्त में हैं। हालांकि इसका कोई सुबूत उनके पास नहीं है। परिजनों ने आशंका जताई है कि पुलिस कभी भी दोनों का एनकाउंटर कर सकती है। बताया कि जुबैर और समीर की मुठभेड़ में पीयूसीएल 2014 और 2016 का कमिश्नरेट पुलिस ने उल्लंघन किया है।
मुठभेड़ के दौरान जिस उपनिरीक्षक मानवेंद्र की बुलेटप्रूफ जॉकिट में गोली लगी है उन्हें ही जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया गया है। नियमानुसार उनको जांच अधिकारी नहीं बनाया जा सकता। ह्यूमन राइट कमीशन को रिपोर्ट नहीं भेजी गई और मजिस्ट्रेट को भी रिपोर्ट नहीं भेजी गई। ऐसे में जिला न्यायालय में परिजनों की ओर से याचिका दायर की गई है।
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