गर्मी में बेसिक स्कूलों के बच्चों को राहत देने के डीएम के आदेश बेमानी साबित हुए हैं। डीएम के आदेशों पर भी परिषदीय विद्यालयों के बिजली कनेक्शन नहीं जुड़ सके हैं। भीषण गर्मी और पसीने में नौनिहाल पढ़ने को मजबूर हैं। एक ओर बच्चे गर्मी से परेशान हैं तो दूसरी ओर उनकी परवाह छोड़ विभागीय अधिकारियों ने अपने एसी-कूलर चलाने का इंतजाम कर लिया है।
बीएसए दफ्तर का कनेक्शन भी कटने से अधिकारियों ने अपने लिए जेनरेटर की व्यवस्था कर ली है। जबकि गर्मी में पढ़ने वाले बच्चों को राहत दिलाने की ओर किसी का ध्यान नहीं है। सरकारी अव्यवस्था की मार झेल रहे बच्चों को कब तक राहत मिलेगी, इसका अफसरों के पास भी जवाब नहीं है।
कर्ठ सालों से बिजली बिल का भुगतान न करने से नगर क्षेत्र और देहात के करीब 200 स्कूलों का कनेक्शन काटा जा चुका है। वर्ष 2010 से अब तक स्कूलों पर एक करोड़ से ज्यादा का बताया है। शासन ने दो वर्षों का बजट तो जारी किया, लेकिन चैक में आईएफसी कोड न होने से भुगतान नहीं हो पा रहा है। एक माह से समस्या जस की तस है।
सवा करोड़ का बिल, बजट आया 21 लाख
पांच सालों में नगर क्षेत्र, देहात और ट्रांस हिंडन एरिया में करीब 1.11 करोड़ का बिल स्कूलों पर बताया है। शासन ने बिल के भुगतान के लिए महज 21 लाख रुपये बजट जारी किया है। ऐसे में बिजली बिल भुगतान पर संशय छा गया है।
इन स्कूलों की है बत्ती गुल
शालीमार गार्डन प्राथमिक विद्यालय, कैला भट्टा प्राथमिक और जूनियर विद्यालय (ईदगाह के करीब), पसौंडा प्राथमिक विद्यालय नंबर-दो, शहीदनगर प्राथमिक विद्यालय एक और दो, प्राथमिक विद्यालय बयाना, प्राथमिक और जूनियर विद्यालय बम्हैटा, जूनियर विद्यालय काजीपुरा आदि।
क्या बोले बीएसए
बिजली बिल के पैसे का चैक स्कूलों को जारी कर दिया गया है। बिजली विभाग ने स्कूलों को अनाप-शनाप बिल भेज दिया है, जबकि शासन से एक सत्र का केवल 3300 रुपया ही बिजली बिल के नाम पर जारी होता है। बिजली विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर बिल कम कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। - डा. प्रवेश यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी
स्कूलों के बिजली कनेक्शन तत्काल जोड़ने के निर्देश पावर कारपोरेशन अधिकारियों को दिए गए थे। फिर भी कनेक्शन क्यों नहीं जोड़े गए इसकी जांच कराई जाएगी।