गाजियाबाद। राज्यकर विभाग ने आयरन ट्रेड में कारोबार करने वाली बुलंदशहर और गाजियाबाद की दो फर्माें ने जॉब वर्क दिखाया, लेकिन इसके बहाने माल की बिक्री कर दी। इन फर्माें के ई-वे बिलों में भी गड़बड़ी पाई गई। ई-वे बिल ऑनलाइन जनरेट करने के बाद बड़ी संख्या में निरस्तीकरण भी किया गया है। जीएसटी रिटर्न के आंकड़ों में पाई गई गड़बड़ी के बाद की गई जांच में 1.57 करोड़ की टैक्स चोरी पाई गई है। राज्यकर विभाग के जोन-दो के अपर आयुक्त ग्रेड-2 ओपी तिवारी ने बताया कि टैक्स चोरी में संलिप्त पाई गई बुलंदशहर की फर्म संचालक के परिवार की ही एक फर्म गाजियाबाद में संचालित की जा रही है। इन फर्माें के द्वारा आयरन स्क्रैप की खरीद करके आयरन की कास्टिंग और एचआर क्वायल की खरीद-बिक्री की जाती है। जांच में पाया गया कि फर्म की ओर से आईटीसी कैश सेट ऑफ बीते दो साल में सिर्फ 4.14 फीसदी व 4.59 फीसदी है। इसमें संदेह होने पर फर्म के दस्तावेजों की पड़ताल की गई तो पाया गया कि फर्म के आठ वाहन तीन वर्षों में बिना ई-वे बिल के और ई-वे बिल के दोबारा प्रयोग करके माल का परिवहन किया गया है। फर्म ने अत्यधिक बार ई-वे बिल का निरस्तीकरण भी किया है। इन दोनों फर्मों ने एचआर शीट की कटिंग के लिए अन्य फर्मों से जॉब वर्क कराया जाना दर्शाया है लेकिन जीएसटी पोर्टल में इससे संबंधित फार्म आईटीसी-04 किसी भी साल में नहीं भरा गया। इस फार्म में जॉब वर्क संबंधी माल के आवागमन का विवरण दर्ज करना होता है। इस फार्म के न भरे जाने से जॉब वर्क कराया जाने का भी सत्यापन नहीं हो पा रहा था। यानी जॉब वर्क के बहाने बिक्री करते हुए इन फर्माें ने जीएसटी चोरी की है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान सीज किए गए प्रपत्रों की विस्तृत जांच कराई जा रही है। फिलहाल फर्म से टैक्स चोरी की 1.57 करोड़ की रकम जमा करा ली गई है।