सरकार ने महज 15 हजार में मकान देने की योजना शुरू की तो गाजियाबाद के सैकड़ों लोगों में आशियाना मिलने की उम्मीद बंधी। लगा कि जल्द ही गाजियाबाद में उनका अपना घर होगा, लेकिन दो सरकारें बदल गईं, आशियाना न मिला।
डूडा की इंटिग्रेटेड हाउसिंग एंड स्लम डेवलेपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) आवासीय योजना में सात साल बाद भी अभी तक आवेदकों को यह नहीं पता कि उन्हें मकान मिलेगा भी या नहीं। अभी तक उनके आवेदनों की जांच का काम भी पूरा नहीं हुआ है।
केंद्र सरकार की आईएचएसडीपी योजना के तहत गाजियाबाद के तहत विजयनगर (सुदामापुरी), डासना, अर्थला और फरीदनगर में 1936 फ्लैट बनने हैं। इन मकानों के लिए छह हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन पत्र जमा किए।
डूडा ने सुदामापुरी में 802 और अर्थला में सिर्फ 75 मकानों का निर्माण पूरा कर आवंटियों को हैंडओवर किया है लेकिन बाकी के बाकी मकानों का निर्माण न तो पूरा हुआ और न ही इनके आवेदकों के फार्मों की जांच पूरी हुई। फार्म की जांच तहसील प्रशासन को सौंपी गई थी।
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लंबा हुआ मकान मिलने का इंतजार
नोडल एजेंसी डूडा ने पहले यह सभी मकान 2012 तक आवंटित करने का दावा किया था। फिर रिवाइज्ड बजट अटका तो 2014 तक डेडलाइन तय की गई। इसके बाद दिसंबर 2015 और अब अप्रैल 2016 में बजट जारी होने के बाद शासन ने 30 मई तक निर्माण कार्य पूरा करने के आदेश दिए थे। यह डेडलाइन भी अब बीत चुकी है।
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आंकड़ों में आवासीय योजना
स्थान मकान आवंटन बजट करोड़ में
विजयनगर - 1236 802 28.32
डासना - 204 133 5.61
अर्थला- 208 26 8.19
फरीदनगर- 288 शून्य 10.6
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आवेदन फार्मों की जांच अंतिम चरण में हैं। तहसील प्रशासन से यह काम जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है। मकानों का निर्माण पूरा होते ही आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। - इंद्रसेन सिंह, परियोजना अधिकारी, डूडा