गाजियाबाद। महापौर के फर्जी साइन कर सामुदायिक केंद्रों की बुकिंग छूट लेने के मामला सामने आया है। फर्जीवाड़ा उस वक्त सामने आया जब संपत्ति प्रभारी दस्तावेज की जांच की। इस मामले में सामुदायिक केंद्र के कार्य देखने वाले रमेश चंद्र और महापौर के दफ्तर में तैनात प्रेमपाल पर आरोप लगे हैं। अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद दोनों को निलंबित कर दिया है। इस मामले की जांच उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी अनुज कुमार को इस मामले की जांच साैंपी है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
जांच में पांच आवेदन पर फर्जी हस्ताक्षर
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को संपत्ति प्रभारी ने जब दस्तावेज को अनुमति देने के लिए जांच की तो दो आवेदन पर महापौर के हस्ताक्षर अलग-अलग मिले। शक होने पर उन्होंने महापौर के पीए से संपर्क किया। पीए ने आने के बाद सभी दस्तावेज को चेक किया तो 5 आवेदन में इस प्रकार का फर्जीवाड़ा पाया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महापाैर ने इस पर नाराजगी जताते हुए आरोपी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई के लिए कहा है। साथ पूर्व के भी आवेदन की जांच के लिए उन्होंने कहा है।
जानकारी के अनुसार सामुदायिक केंद्र की बुकिंग के लिए 11 हजार रुपये के साथ जीएसटी देना होता है। महापौर के पास शक्ति होती है कि वह किसी जरूरतमंद को छह हजार रुपये की छूट दे सकती है। इसमें एक पत्र उनके हस्ताक्षर के लगता है। दोनों कर्मचारियों यह लाभ अपने कुछ परिचितों दिलवाने के लिए फर्जीवाड़ा किया। अधिकारियों के अनुसार जिनके नाम से आवेदन किए उनकी जानकारी भी जुटाई जा रही है।