क्षेत्र के गांव वाजिदपुर निवासी राशिद खान ने बताया कि वह झोपड़ी में ही परिवार के साथ रहते हैं। सोमवार दोपहर को राशिद मजदूरी करने गया था और उसकी पत्नी झोपड़ी के बाहर थी। झोपड़ी में उसके पशु बंधे हुए थे और पांच वर्षीय बेटा उजैफ व छह वर्षीय बेटी अलफैज वहीं खेल रहे थे। वहीं झोपड़ी के पास गड्ढे में गोबर और कूड़ा इकट्ठा हो रहा है। जहां सोमवार दोपहर को किसी ने आग लगा दी। कूड़े की आग की लपट धीरे-धीरे झोपड़ी तक पहुंच गई। इसी के साथ तेजी से झोपड़ी में आग फैल गई।
बच्चों का शोर सुनकर ग्रामीण वहां पहुंचे और उनको बाहर निकाला। तब तक बच्चों के हाथ, पैर व छाती झुलस चुके थे। तभी परिजन बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचे और ग्रामीण आग बुझाने में जुट गए। राशिद ने बताया कि बच्चों के घाव पर दवाई लगवाई गई है। हालत खतरे से बाहर है। झोपड़ी में रखा हजारों रुपये का सामान जल कर राख हो गया है। आरोप है कि सूचना के बाद भी अग्निशमन की टीम मौके पर नहीं पहुंची। पीड़ित ने प्रशासनिक अधिकारियों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।