गाजियाबाद। एससी-एसटी विशेष अदालत ने करीब दस वर्ष पुराने हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने माना कि रुपये के लेनदेन को लेकर हुए विवाद के दौरान किए गए हमले में युवक की मौत हुई थी। हालांकि अदालत ने दोनों आरोपियों को एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र मिश्रा की अदालत ने बागपत जिले के खेकड़ा निवासी उमेश शर्मा और अंकुर शर्मा को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराया। दोनों दोषियों पर 11-11 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष के प्रस्तुत साक्ष्य, चिकित्सीय रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
यह थी घटना
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार जटवाड़ा निवासी नरेंद्र कुमार ने कारोबार के लिए उमेश शर्मा से तीन हजार रुपये उधार लिए थे। आर्थिक तंगी के कारण वह निर्धारित समय पर रकम नहीं लौटा सका। 31 जुलाई 2016 को हिसाब करने के लिए नरेंद्र को लोहियानगर स्थित एक बीयर की दुकान के पास बुलाया गया। नरेंद्र अपने छोटे भाई राजकुमार के साथ वहां पहुंचा था। इसी दौरान रुपये के लेनदेन को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर राजकुमार की पिटाई की गई, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए एमएमजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
अदालत ने माना पिटाई से हुई थी मौत
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राजकुमार की मृत्यु उमेश और अंकुर की पहुंचाई गई चोटों के कारण हुई थी। इसके आधार पर दोनों दोषियों को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं साक्ष्य मिटाने के अपराध में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।