गाजियाबाद। मथुरा के जवाहर बाग कांड में सभी आरोपियों के पेश नहीं होने से सीबीआई की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में चार्ज फ्रेम (आरोप तय) नहीं हो पा रहा है, इस कारण 15 महीने से तारीख पर तारीख लग रही है। प्रकरण के दो आरोपियों के गंभीर रूप से बीमार होने से सीबीआई उन्हें अदालत में पेश नहीं कर पा रही है। सीबीआई ने मामले की साढ़े छह साल तक जांच के बाद 90 लोगों को आरोपी बनाते हुए दिसंबर 2022 को अदालत में लगभग 800 पेज का आरोप पत्र पेश किया था। इसमें 15 आरोपियों की मुकदमा शुरू होने से पहले ही मौत हो चुकी है। अगली सुनवाई की अदालत में 30 मार्च की तारीख लगी है।
सीबीआई कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार मामले में दो आरोपी डेढ़ वर्ष से गंभीर रूप से बीमार हैं। उनकी ऐसी स्थिति नहीं है कि अदालत में उन्हें पेश किया जाए। इस कारण से मुकदमे में सिर्फ तारीख लग रही है। तारीख पर पेशी के दौरान कई आरोपी अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी भेज देते हैं।
दो जून 2016 को हुई थी घटना
दो जून 2016 को तत्कालीन जिलाधिकारी राजेश कुमार व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के नेतृत्व में पुलिस फोर्स के साथ जवाहर बाग को खाली कराने के लिए कूच किया। दो घंटे तक पुलिस और रामवृक्ष के लोगों में बात होती रही, उसके बाद कब्जाधारियों ने पुलिस पर हमला कर दिया था। उस हमले में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ रिफाइनरी संतोष कुमार यादव बुरी तरह जख्मी हो गए थे, बाद में दोनों की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में जवाहर बाग में मौजूद कब्जाधारियों में 29 लोग मारे गए थे। घटना के दूसरे दिन सुबह पुलिस ने पुष्टि की कि रामवृक्ष यादव भी इन 29 लोगों में मारा गया था। इस मामले की सीबीआई जांच हुई और करीब साढ़े छह साल बाद आरोप पत्र पेश किया था।
यह था प्रकरण
बाबा जय गुरुदेव के अनुयायी रामवृक्ष यादव के नेतृत्व में सशस्त्र अतिक्रमणकारियों के एक दल ने जवाहर बाग में 2014 से कब्जा कर रखा था। मूलरूप से गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव अपने निजी प्रशासन, राजस्व व निजी सेना के साथ यहां से अपनी समानांतर सरकार चला रहा था। प्रशासन का मानना था कि रामवृक्ष कुछ राजनेताओं का नजदीकी था और इसके दम पर जवाहर बाग पर कब्जा करना चाहता था। 2014 में आंदोलनकारियों ने पहले अपनी मांगों के समर्थन में सागर, मध्य प्रदेश से दिल्ली के लिए मार्च शुरू किया। अप्रैल में लगभग 500 सदस्यों ने मथुरा में प्रदर्शन किया। प्रशासन ने उन्हें दो दिनों के लिए जवाहर बाग सार्वजनिक पार्क में प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बाद यह पार्क वारदात के बाद ही खाली हो सका।
मई 2016 में रामवृक्ष ने हाईकोर्ट में लगाई थी अर्जी
जवाहर बाग खाली कराने को लेकर रामवृक्ष यादव हाईकोर्ट चला गया। मई 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामवृक्ष यादव की अपील खारिज कर दिया और सार्वजनिक पार्क पर जबरन काबिज अतिक्रमणकारियों बेदखल करने के लिए पुलिस को आदेश दिया। इसके बाद अतिक्रमणकारियों की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई। दो जून 2016 की शाम लगगभ पांच बजे पुलिस की एक टीम पार्क में पहुंची। इन अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। गोलियां चलाईं। शुरुआत में पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों के साथ जवाबी कार्रवाई की। दो वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो जाने के बाद पुलिस ने इन लोगों पर गोलियां चलाईं थी।