गाजियाबाद। औद्योगिक क्षेत्रों में बार-बार होने वाली बिजली ट्रिपिंग उद्योगों पर भारी पड़ रही है। उद्यमियों का कहना है कि 15 से 30 मिनट तक की ट्रिपिंग दिनभर में चार से पांच बार हो रही है। इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है और औद्योगिक इकाइयों को प्रतिदिन 35 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले के 12 औद्योगिक क्षेत्रों में 5200 से अधिक मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां संचालित हैं, जहां प्रतिदिन करीब 400 करोड़ रुपये का उत्पादन होता है। औद्योगिक संगठनों के अनुसार, बिजली आपूर्ति में लगातार व्यवधान आने से मशीनें अचानक बंद हो जाती हैं।
बिजली आने के बाद भी उत्पादन तुरंत शुरू नहीं हो पाता। अधिकांश मशीनों को दोबारा सामान्य तापमान और कार्यक्षमता तक पहुंचने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। इस लिहाज से 15 मिनट की ट्रिपिंग होने पर उत्पादन प्रक्रिया सामान्य होने में करीब सवा घंटा लग जाता है।
उद्यमियों का कहना है कि इससे उत्पादन घट रहा है और समय पर ऑर्डर पूरे करने में परेशानी हो रही है। इसका असर निर्यात और बड़े औद्योगिक ऑर्डरों पर पड़ने लगा है। कई इकाइयों में कर्मचारियों को मशीनें दोबारा चालू होने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे श्रम उत्पादकता भी प्रभावित होती है।
ऑटो पार्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों पर सबसे ज्यादा असर
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष अरुण गुप्ता ने बताया कि इंजीनियरिंग, ऑटो पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील और प्लास्टिक उद्योग ट्रिपिंग से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उत्पादन के बीच बिजली जाने से कच्चा माल खराब होने और मशीनों में तकनीकी खराबी का खतरा बढ़ जाता है। इससे उद्योगों की उत्पादन लागत भी लगातार बढ़ रही है। केमिकल उद्योग से जुड़ी उद्यमी स्वाती अरोड़ा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति मिलनी चाहिए। ट्रिपिंग की समस्या पर यदि जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया तो उत्पादन लागत बढ़ने के साथ उद्योगों की प्रतिस्पर्धी क्षमता भी प्रभावित होगी।
उद्यमियों की प्रमुख मांगें
औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जाए।
बार-बार ट्रिपिंग वाले फीडरों की तत्काल जांच कर समाधान किया जाए।
लोड प्रबंधन और बिजली नेटवर्क को मजबूत किया जाए।
उद्योगों के लिए अलग विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जाए।