गाजियबाद। रेलवे लाइन पर काम कर रहे ट्रैकमैन अजय कुमार (28) की शनिवार करीब पांच बजे गोशाला फाटक के पास ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे से रेलवे कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। वे हादसे के लिए अफसरों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराते हुए गोशाला फाटक के पास ही ट्रैक पर बैठ गए। ट्रैक बाधित हो जाने वंदेभारत और राजधानी एक्सप्रेस समेत 12 ट्रेनें जहां की तहां खड़ी हो गईं।
उस समय पांच ट्रेनें ट्रैक पर थीं और सात गाजियाबाद जंक्शन पर। नई दिल्ली से अलीगढ़, मुरादाबाद, हरिद्वार, दनकौर और मेरठ जाने वाली ट्रेनों को ट्रैक पर ही रोकना पड़ा। अफसरों पर कार्रवाई की मांग लेकर कर्मचारी चार घंटे तक ट्रैक को जाम किए बैठे रहे। पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें खदेड़ा और ट्रैक को खाली कराया। चार घंटे बाद ट्रेनें रवाना हो सकीं।
शाम पांच से रात के नौ बजे तक यह हंगामा चला। इस बीच रेलवे के अधिकारी प्रदर्शनकारियों से वार्ता करते रहे। अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया। उनसे उनकी मांगें पूछीं। वे लोग सीनियर सेक्शन इंजीनियर (एसएसई) के निलंबन की मांग पर अड़े थे। जब बातचीत से रास्ता नहीं निकल सका तो रेलवे पुलिस को लगाया। पुलिस ने पहले वार्ता की। यह सफल नहीं रही तो बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया।
संसाधन और कर्मचारी कम थे, इसलिए हुआ हादसा
रेलवे कर्मियों का आरोप था कि एसएसई ने ट्रैक पर काम कर रहे कर्मियों को कोई सुरक्षा नहीं दी। न ही पर्याप्त कर्मचारी और संशाधन थे। पर्याप्त लोगों की ड्यूटी होती तो हादसा नहीं होता। ट्रैक पर वेल्डिंग का काम होने का संकेत भी झंडी से रेलवे चालक को नहीं दिया गया। इससे हादसा हुआ।
गाजियाबाद से नई दिल्ली जाने वाले रेलवे ट्रैक पर पांच कर्मचारी वेल्डिंग का काम कर रहे थे। शाम करीब पांच बजे दनकौर से दिल्ली जाने वाले एएमयू तेज गति से आई। गोशाला के नजदीक ट्रेन को देख चार कर्मचारी दौड़कर दूर हो गए। उनकी जान बच गई, लेकिन अजय कुमार नहीं हट सके। ट्रेन का पहिया अजय कुमार के पेट से होकर निकला और शरीर के दो हिस्से हो गए। करीब 50 मीटर दूर जाकर ट्रेन रुकी।
हंगामे के बाद एसएसई को हटाया गया
गुस्साए कर्मचारियों को समझाने के लिए रेलवे के आला अफसर भी पहुंचे लेकिन बात नहीं बन सकी। प्रदर्शनकारी सीनियर सेक्शन इंजीनिर (एसएसई) के निलंबन की मांग पर अड़े थे। डीआरएम, सीनियर डीओएम मुरादाबाद और डीओएम ने भी भोपुरा निवासी अजय कुमार के परिजनों से वार्ता की। डीआरएम सुखवेंद्र सिंह ने बताया कि एसएसई का ट्रांसफर कर दिया गया है और अजय के परिवार के एक सदस्य को रेलवे में नौकरी और 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।