बिजली संकट से जूझ रहे गाजियाबाद को रविवार से राहत मिल सकती है। यूपी के तीन पावर स्टेशनों में से दो में शनिवार को उत्पादन सुधरा है। रविवार से ललितपुर और पारीछा विद्युत उत्पादन इकाई में पूरा उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि शनिवार को उत्पादन सुधरने के बावजूद शहर में विद्युत डिमांड और आपूर्ति में करीब 200 मेगावाट से ज्यादा का अंतर रहा। इसकी वजह से शहर की अधिकांश कालोनियों में 8 से 10 घंटे की बिजली कटौती रही।रेल मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाने के चलते यूपी की अनपारा, ललितपुर और पारीछा विद्युत उत्पादन इकाई में कोयले की आपूर्ति कम हो गई थी।
इसकी वजह से इन इकाई में विद्युत उत्पादन कम हो गया था। इसका असर गाजियाबाद समेत पूरे प्रदेश में पड़ रहा था। पावर कारपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक शनिवार से पारीछा और ललितपुर इकाई में उत्पादन सुधरा है। हालांकि अभी भी डिमांड और आपूर्ति में बड़ा अंतर है।
शनिवार को गाजियाबाद में बिजली की डिमांड करीब 800 मेगावाट रही, जबकि आपूर्ति सिर्फ 600 मेगावाट रही। 200 मेगावाट बिजली की कमी के चलते शहर की नंदग्राम, संजय नगर, कविनगर, राजनगर, शास्त्री नगर, कमला नेहरू नगर, विवेकानंद नगर, नेहरू नगर, पटेल नगर समेत अधिकांश कालोनियों में 8 से 10 घंटे बिजली कटौती की गई।
गर्मी में लगातार कई घंटे की कटौती से लोग बिलबिला गए। पानी की आपूर्ति पर भी इसका असर पड़ा। हालांकि शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को थोड़ी राहत रही। शुक्रवार को बिजली कटौती 10 से 15 घंटे तक पहुंच गई थी। पावर कारपोरेशन के अधीक्षण अभियंता (ट्रांसमिशन) यतेंद्र कुमार का कहना है कि रविवार तक दो इकाई में उत्पादन सुधरने की उम्मीद है।
इससे गाजियाबाद को भी राहत मिलेगी।
बिजली कटौती से डीजल की खपत बढ़ी
बिजली संकट की वजह से शहर में डीजल की मांग बढ़ गई। लंबी कटौती के चलते शहर में जनरेटर का इस्तेमाल बढ़ गया है। पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष जयवीर सिंह ने बताया कि शहर के करीब 40 पेट्रोल पंपों पर 15 से 20 प्रतिशत तक डीजल ज्यादा बिका। आमदिनों में प्रतिदिन एक पेट्रोल पंप पर तकरीबन 5 हजार लीटर डीजल की बिक्री होती है।
कटौती चलते यह आंकड़ा 7 हजार लीटर तक पहुंच गया है।उधर, बिजली कटौती के कारण उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। गाजियाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि शहर में करीब 15 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं। दिन में कटौती होने से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। चार दिनों में प्रतिदिन 7 से 8 घंटे कटौती रही है।
इसकी वजह से करीब 500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई करना भी आसान न होगा। एमजीआर औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष एनएन मिश्रा के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र के कई उद्यमियों ने कटौती के कारण नाइट शिफ्ट बंद कर दी।
वहीं दिन में जिस तरह से बिजली का आना-जाना लगा रहा उससे उद्यमी भी समझ नहीं पाए कि वह किस समय फैक्ट्री को बंद करें।