गाजियाबाद। साथ में रहने वाली महिला से पीछा छुड़ाने के लिए परिजनों ने मोदीनगर रेलवे ट्रैक पर मिले एक अज्ञात शव को लापता बेटे का बताकर दाह संस्कार कर दिया। इसके बाद महिला को उसके दो छोटे बच्चों के साथ घर से निकाल दिया गया। पीड़ित महिला जब थाने पहुंची तो मामला खुला। पुलिस अब यह पता कर रही है कि आखिर रेलवे ट्रैक पर मिला शव किसका था।
महिला थाने में एक जनवरी 2026 को दी गई तहरीर के अनुसार पीड़िता जनपद मेरठ की रहने वाली है। वर्ष 2018 में परिजनों ने उसका निकाह अपने ही संप्रदाय के एक युवक से कराया था। निकाह के बाद दंपती की एक बेटी हुई, लेकिन पति आपराधिक प्रवृत्ति का होने के कारण वर्तमान में मेरठ जेल में बंद है।
इसी दौरान पीड़िता की मुलाकात मुरादनगर निवासी एक युवक से हुई। आरोप है कि युवक ने धर्म परिवर्तन कर पीड़िता को बेटी समेत अपने साथ मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के संजयनगर में किराये के मकान में रख लिया। उनके दो बच्चे हुए। एक पांच साल का बेटा और दो साल की बेटी।
जून 2025 में युवक अचानक लापता हो गया। पीड़िता का आरोप है कि वह साथ रह रहे युवक के परिजनों के घर पहुंची। जहां उसके जेठ, देवर, सास और ससुर ने बच्चों सहित उसे घर से निकाल दिया। पीड़िता की शिकायत पर
महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। दूसरी ओर युवक के परिजनों ने मधुबन बापूधाम थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी।
तीन जनवरी 2026 को परिजनों को सूचना मिली कि मोदीनगर थाने में एक अज्ञात शव पड़ा है, जिसकी पहचान नहीं हो पा रही है। परिजन मोदीनगर थाने पहुंचे और शव की तस्वीर, कपड़े और शारीरिक बनावट के आधार पर शव की पहचान अपने लापता बेटे के रूप में कर दी। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक यह शव 27 दिसंबर 2025 को मोदीनगर रेलवे ट्रैक पर मिला था। परिजनों ने शव को अपने बेटे का बताकर विधि-विधान से दाह संस्कार कर दिया और बेटे के साथ रहने वाली महिला और उसके बच्चों से पीछा छुड़ा लिया।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन बाद साथ में रहने वाला युवक मेरठ रोड स्थित एक फ्लाईओवर के नीचे नशे की हालत में सोता मिला। युवक कई दिनों से न तो घर गया था और न ही पीड़िता के पास आया था। पीड़िता ने उसकी जिंदा होने की सूचना महिला थाने में दी।
पुलिस की काउंसलिंग के दौरान युवक ने रिश्ता-नाता निभाने से साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद पीड़िता बगैर किसी इंसाफ के लौट आई। अब महिला मजदूरी करती है और अपने पहले पति से हुई बेटी और लिव-इन रिलेशन से जन्मे दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही है।
इस पूरे मामले ने पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा सवाल यह कि रेलवे ट्रैक पर मिला शव आखिर किसका था? वह किसी का बेटा, किसी का पति या किसी बच्चे का पिता रहा होगा। शव का दाह संस्कार कर देने के बाद अब उसकी शिनाख्त करना पुलिस के लिए चुनौती है।
डीसीपी ग्रामीण सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार साथ में रहने वाली महिला भी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत सुरक्षा और भरण-पोषण का दावा कर सकती है। पीड़िता को इंसाफ दिलाया जाएगा। साथ ही संबंधित थाना पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि अज्ञात शव की शिनाख्त कराने का प्रयास किया जाए।