पुलिस निलंबित (सांकेतिक तस्वीर)
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खाकी की आड़ में मनमानी चलाकर बेकसूर झूठे मुकदमे में फंसाने वाले पुलिसकर्मियों पर आईजी का चाबुक चला है। आईजी ने मुरादनगर थाने के दरोगा और एक सिपाही के सस्पेंड करते हुए इनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। उक्त पुलिसकर्मियों पर आरोप लगा था कि इन्होंने रिश्वत न देने पर मेरठ निवासी रिटायर कर्नल के बेटे को शराब तस्कर बना दिया था। जांच में आरोप सही पाए जाने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
मेरठ के थाना गंगानगर क्षेत्र के मीनाक्षीपुरम निवासी रिटायर कर्नल एके शर्मा का बेटा विक्रम शर्मा बिल्डर है। विक्रम के मुताबिक बीती 15 जुलाई को उसने नई स्कॉर्पियो कार खरीदी। 20 जुलाई को उनका साला नितिन शर्मा निवासी शाहपुर सैनियान मोहल्ला, मुजफ्फरनगर उनकी कार मांगकर गाजियाबाद गया था। रात साढ़े 9 बजे लौटते वक्त मुरादनगर पुलिस ने उसे रोक लिया।
दरोगा दीपक कुमार व विपिन कुमार ने आरोप मढ़ दिया कि वह एक्सीडेंट करके भागा है। सफाई देने पर दरोगाओं ने ढाई लाख रुपये की मांग की। विक्रम शर्मा का कहना है कि सूचना पर वह खुद मुरादनगर थाने पहुंच गए। आरोप है कि एसओ ने भी उनसे ढाई लाख रुपये मांगे और न देने पर नितिन व उसे शराब तस्करी में जेल भेजने की धमकी दी।
विक्रम का कहना है कि उन्होंने 20 जुलाई को ही दरोगा दीपक को 50 हजार रुपये दे दिए, लेकिन इसके बावजूद उनके साले को शराब तस्करी में जेल भेज दिया गया। इतना ही नहीं, वह दो दिन तक चौकी व थाने गए थे, लेकिन तीसरे दिन दर्ज मुकदमे में उन्हें भी शराब तस्कर बनाकर फरार दिखा दिया।
एसपी देहात ने इकट्ठा किए थे सुबूत
विक्रम शर्मा ने एक पुलिसकर्मी की ऑडियो केसाथ आईजी से शिकायत की थी। आईजी ने मामले की जांच एसपी देहात को सौंपी थी। एसपी देहात ने ऑडियो व थाने की फुटेज के अलावा आरोपी पुलिसकर्मियों व पीड़ित के बयान दर्ज कर आईजी को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाने पर मुरादनगर थाने के दरोगा विपिन, दरोगा दीपक व सिपाही सिंह राज को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं-
आलोक कुमार सिंह, आईजी