लोनी में चार साल पहले हुई एक युवक की हत्या के मामले में कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व कांस्टेबल और हेडकांस्टेबल समेत तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इसी मामले के चौथे आरोपी को कोर्ट ने आर्म्स एक्ट का आरोपी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई और पांचवें को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जनपद न्यायाधीश रामकृष्ण उपाध्याय ने बृहस्पतिवार को यह फैसला सुनाया।
लोनी की राजनगर कालोनी में 5 अगस्त 2012 को जितेंद्र उर्फ गुड्डू नामक युवक की शाम करीब चार बजे उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह घर से दुकान पर सामान लेने निकला था। हमलावरों ने उस पर तमंचे से फायर और चाकू से वार किए थे।
इस मामले में गुड्डू की मां राजबाला ने एफआईआर में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल कुलदीप उर्फ नीटू, उसके भाई टिंकी, दिल्ली पुलिस में ही हेड कांस्टेबल इस्पेंदर और उसके भाई सुभाष के अलावा कुलदीप नामक एक अन्य युवक को नामजद कराया था।
जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेश यादव के अनुसार जितेंद्र अपने छोटे भाई सोनी की हत्या के मामले में गवाह था। सोनी की हत्या कुलदीप और टिंकी के ही एक अन्य भाई गुल्लू ने की थी। आरोपी गुड्डू पर दबाव बना रहे थे कि वह कोर्ट में गवाही न दे।
7 अगस्त 2012 को गवाह जितेंद्र की कोर्ट में गवाही थी। गवाही से दो दिन पहले ही उसकी हत्या कर दी गई। जनपद न्यायाधीश ने बृहस्पतिवार को कुलदीप और उसके भाई टिंकी के साथ ही इस्पेंदर को आजीवन कारावास और साढे़ पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
चौथे आरोपी सुभाष को आर्म्स एक्ट का दोषी मानते हुए कोर्ट ने उसे दो साल कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि पांचवें आरोपी कुलदीप को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।